न्याय धारा/ कानपुर नगर। गुरुवार 22 अक्टूबर 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य दक्षिणायन, आश्विन मास शुक्ल पक्ष की दसमी, शरद ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। युवा साहस, उत्साह एवं ऊर्जा के संघनित पुंज हैं। वह चाहे तो नई परिभाषा गढ़ सकते हैं, समाज एवं राष्ट्र का कायाकल्प कर सकते हैं। पहले समाज सेवा और व्यापार दो भिन्न कार्य माने जाते थे। बाद में यह दोनों एक हो गए इसका परिणाम है कि आज युवाओं की नई पौध एक से बढ़कर एक ऐसे अनोखे उद्यम शुरू कर रही है जिनसे उनका ही नहीं, समाज और पर्यावरण का भी भला होता दिख रहा है।
किसी भी देश की प्रगति वहां के युवा शक्ति पर निर्भर करती है। युवा वर्ग असीम महत्वाकांक्षाओं से सराबोर होते हैं। यदि इन युवाओं को अपनी प्रतिभा का उपयोग करने दिया जाए तो इसका प्रयोग मानव संसाधन के रूप में होगा। युवा जीवन का वसंत है। यह अन्वेषण और विकास का युग है। उनमें राष्ट्र को एक बेहतर कल में बदलने की अपार शक्ति है। उक्त विचार छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में श्रीमद् भगवद् गीता एवं वैदिक वांङ्गमय शोधपीठ एवं स्कूल आफ एडवांस्ड एग्रीकल्चर साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के संयुक्त तत्वावधान में "युवाओं के लिए भगवद् गीता की भूमिका" विषय पर व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ अवध दुबे ने व्यक्त किए।
गीता शोधपीठ के सह निदेशक अनिल कुमार गुप्त ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि आज के समय में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। देश की अनेक समस्याओं को हल करने के लिए उनकी आवश्यकता है। हमारा मानना है कि युवा उन्हें हल करने में सक्षम है । युवा हमारे जीवन और राष्ट्र हैं। हमारे देश को गौरवान्वित करेंगे। विभाग के डायरेक्टर डॉ. हिमांशु त्रिवेदी ने स्वागत करते हुए आज गीता की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. श्रेया सिंह, डॉ राकेश कुमार मिश्रा, डॉ. प्रियंका गुप्ता उपस्थित रहे।

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