न्याय धारा/ ठठिया, कन्नौज। शुक्रवार 23 अक्टूबर 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य दक्षिणायन, आश्विन मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी, शरद ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। मंथन फाउंडेशन और श्री आदर्श इण्टर कॉलेज के तत्वावधान में मंथन फाउंडेशन की ओर से संस्थाप्रमुख सरिता निर्झरा द्वारा ‘ ऊर्जा, संयम और मर्यादा’ विषय पर एक जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई।
इस कार्यशाला में कक्षा छः से बारह तक के छात्र छात्राओं ने भाग लिया तथा किशोरावस्था के दौरान आने वाली चुनौतियों, उनके लक्ष्य निर्धारण, सहपाठियों पर मानसिक दबाव, शारीरिक एवं भावनात्मक बदलावों और सह शिक्षण काल में सहपाठियों के आपसी संबंधों में शील सदाचरण व सम्मान के महत्व पर विद्यार्थियों से सीधे वार्तालाप किया गया और उनके किशोर मन के उद्वेग और कल्पनाओं के उन अनुत्तरित प्रश्नों को सुनने और समझने के उपरांत उन्हें स्वयं इस पर विचार करने का अवसर प्रदान कर उन्हें जागरूक करते हुए निदान दिए गए।
कार्यशाला का आयोजन विद्यालय प्रबन्ध समिति की सक्रिय सदस्य प्रीति श्रीवास्तव के सहयोग से किया गया। कार्यशाला में छात्रों और छात्राओं को उनकी मनोजनित समस्याओं को सुनने के लिए दो पृथक समूह में विभक्त कर अलग कक्षों में सत्र प्रारंभ हुए।
विद्यालय के प्रबंधक अवधेश कुमार मिश्र ने कार्यशाला प्रतिभागियों एवं कार्यक्रम की मुख्य कार्यकर्ता को अंग वस्त्र भेंट किए।
प्रधानाचार्य प्यारे लाल विद्यापति एवं वरिष्ठ प्रवक्ता अनुराधा ने आगंतुक मुख्य वक्ता एवं आयोजक प्रीति श्रीवास्तव का माल्यार्पण एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि मंथन फाउंडेशन की संस्थापक सरिता निर्झरा , विगत एक दशक से अधिक समय से बच्चों और किशोरों के साथ कार्य कर रही हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को अपनी भावनाओं, विचारों और व्यवहार को बेहतर ढंग से समझने तथा सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला में तीन सत्र आयोजित किए गए।
पहले सत्र में छात्राओं के साथ किशोरावस्था की चुनौतियों, व्यक्तिगत अनुभवों, शारीरिक बदलावों और सामाजिक अपेक्षाओं पर चर्चा की गई। दूसरे सत्र में छात्रों के साथ सहपाठियों के दबाव, व्यवहार, भावनात्मक उलझनों और स्वयं की पहचान जैसे विषयों पर संवाद हुआ। इन अलग-अलग सत्रों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को सहज वातावरण उपलब्ध कराना था, ताकि वे बिना झिझक अपने प्रश्न पूछ सकें और अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।
तीसरे, संयुक्त सत्र में सामाजिक मान्यता की चाह, समाज और सोशल मीडिया का प्रभाव, संबंधों में सहमति, व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान तथा जिम्मेदार व्यवहार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इस पहल ने किशोरावस्था से जुड़े संवेदनशील विषयों पर खुलकर संवाद करने और युवाओं में सम्मान, समझ तथा जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
विद्यार्थियों को समझाया गया कि स्वस्थ संबंध आपसी सम्मान, स्पष्ट संवाद और एक-दूसरे की सहमति पर आधारित होते हैं। साथ ही, उन्हें अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने और बाहरी दबावों के बीच विवेकपूर्ण निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया गया।
छात्र छात्राओं के सम्मिलित सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य सहित सभी शिक्षक एवं शिक्षिकाओं ने भी भाग लिया।
कार्यशाला को शिक्षकों और विद्यार्थियों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिली।
कार्यशाला का उद्देश्य किशोरावस्था के दौरान आने वाली चुनौतियों, लक्ष्य निर्धारण, सहपाठियों के दबाव, शारीरिक एवं भावनात्मक बदलावों और आपसी संबंधों में सहमति व सम्मान के महत्व पर विद्यार्थियों को जागरूक करना था। इन अलग-अलग सत्रों का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को सहज वातावरण उपलब्ध कराना था, ताकि वे बिना झिझक अपने प्रश्न पूछ सकें और अपनी समस्याओं को साझा कर सकें।
इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों को सजग, समझदार, संवेदनशील, आत्मविश्वासी और उत्तरदायी नागरिक बनने के लिए तैयार करना है।

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