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शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने महाविद्यालय परिसर की सफाई कर स्वच्छता का संदेश दिया

न्याय धारा/ अकबरपुर, कानपुर देहात। शुक्रवार 02 अक्टूबर 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य दक्षिणायन (पितृ पक्ष), आश्विन मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी, शरद ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर।  गांधी जयंती के अवसर पर नगर के अकबरपुर महाविद्यालय में देश के प्रमुख महापुरुष महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई तथा विद्यालय परिसर की सफाई करते हुए महाविद्यालय के शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों ने स्वच्छता का संदेश दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गांधी विचारधारा से प्रेरित श्री अंकुर सिंह, श्रीमती शांति लिपिक, रमाकांत परिचर और बीएड की छात्रा आकांक्षा के द्वारा झझंडारोहण द्वारा हुआ, तत्पश्चात्  महाविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने उक्त महापुरुषों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पण किये।

इसके पश्चात महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा महाविद्यालय के स्टाफ एवं छात्र-छात्राओं ने परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में बृहद् सफाई का कार्य किया। इसके पश्चात् उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार चल रहे “सेवा संकल्प अभियान” के अंतर्गत अकबरपुर महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना ‘अटल इकाई’ द्वारा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने इस राष्ट्रीय पर्व के विषय में चर्चा की तथा राष्ट्र निर्माण में व्यक्ति और समाज की भूमिका को बताया।महाविद्यालय की छात्रा आकांक्षा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि व्यक्ति को बाहरी एवं आंतरिक दोनों प्रकार की स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए। शारीरिक स्वच्छता के साथ ही विचारों की स्वच्छता भी आवश्यक है। उन्होंने गांधी जी के दक्षिण अफ्रीका आंदोलन, सत्याग्रह आंदोलन, नील विद्रोह आदि के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम महा-आंदोलन में उनकी अभूतपूर्व भूमिका पर प्रकाश डाला जबकि काजल ने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार को 143 देशों द्वारा स्वीकार करते हुए “अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस” मनाया जाता है, जोकि भारत के लिए अत्यंत गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि शास्त्री जी ईमानदारी एवं कर्तव्य निष्ठा की पराकाष्ठा थे जबकि महात्मा गांधी अहिंसा एवं सर्वोदय के लिए जाने जाते हैं।

बीएड प्रथम वर्ष के छात्र आदर्श ने कहा कि महान व्यक्ति एवं समाज सुधारकों को सुनने, उनके विचारों को पढ़ने और उसका चिंतन करने पर बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि व्यवहार में परिवर्तन धीरे-धीरे आता है, अगर हम अपने महान विचारकों को स्वीकार करते हुए उनसे सीखकर अपने व्यवहार में परिवर्तन नहीं लाते हैं तो अभी मेरे सपनों का भारत दूर है।महाविद्यालय के छात्र मानस ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री की तुलना करते हुए कहा के दोनों ही महान व्यक्तित्व रहे हैं तथा सादा जीवन उच्च विचार, ईमानदारी एवं सादगी दोनों लोगों के जीवन में ही देखने को मिलता है। तान्या ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्वतंत्रा से स्वच्छता अधिक महत्वपूर्ण होती है। अजीत ने अपने वक्तव्य को सोहनलाल द्विवेदी की पंक्तियों के माध्यम से व्यक्त करते हुए कहा कि “दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।” उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों की प्रासंगिकता को व्यक्त करते हुए कहा कि सत्य और अहिंसा से बड़ी से बड़ी लड़ाई जीती जा सकती है। हमें हमेशा सत्य बोलना चाहिए, उनकी शिक्षाएं इतनी महान रही हैं जो आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही हैं। उनके विचारों को मन एवं आचरण में उतारना चाहिए। उनका विचार स्वच्छ भारत मिशन के रूप में आज भी सर्वत्र व्याप्त है।

महाविद्यालय के डीएलएड विभाग के अध्यक्ष डॉ0 देवदत्त शुक्ला ने कहा कि गांधी जी और शास्त्री जी दोनों ही उदार व्यक्तित्व के धनी थे। अगर हम अंश-मात्र भी उनके विचारों को अपने जीवन में उतार लेंगे तो हमारा जीवन निश्चित ही सफल हो जाएगा। महाविद्यालय के बीएड विभाग के सहायक आचार्य एवं कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के जिला मंत्री डॉ0 अभिनव सिंह ने कहा कि गांधी बनना बहुत कठिन है, हम सौ जन्म लेंगे तब भी गांधी जैसे नहीं बन सकते हैं। उन्होंने राजकुमार शुक्ल के चंपारन प्रकरण के माध्यम से मोहनदास से गांधी बनने के प्रसंग का वर्णन किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ0 अंकुर सिंह की उपस्थिति रही, उन्होंने ईमानदारी सत्य अहिंसा सत्याग्रह जैसे आदर्श की चर्चा करते हुए महात्मा गांधी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला तथा कर्तव्य निष्ठा, ईमानदारी एवं राष्ट्र प्रेम जैसी विशेषताओं के साथ लाल बहादुर शास्त्री की संघर्ष से समृद्धि तक की यात्रा का उल्लेख किया तथा उनके “सादा जीवन उच्च विचार” जीवन शैली को परिलक्षित किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 उमेश चन्द्र तिवारी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के आदर्श जीवन चरित्र से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की अपील की तथा विद्यार्थियों से कहा कि हमारे इन महान समाज सुधारकों ने मूल्यों को जिया है तथा हमें इनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन में मूल्यों को धारण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिवर्तन हमेशा स्वयं से आरंभ होता है। अतः हमें किसी भी परिवर्तन की शुरुआत अपने आप से करनी होगी, तभी हम दूसरों के लिए प्रेरणा एवं आदर्श के स्रोत बनेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सेवा संकल्प अभियान की महाविद्यालय प्रभारी डॉ0 रश्मि पांडेय ने समस्त अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया जबकि हिंदी विभाग के डॉ0 राम मनोहर मिश्र ने कार्यक्रम का संचालन किया।

कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ0 उमेश चंद्र तिवारी, पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर रामकृष्ण चतुर्वेदी, प्रोफेसर अंजू शुक्ला, डॉ0 रत्नेश कुमार, डॉ0 विकास मिश्रा, डॉ0 अर्चना द्विवेदी, डॉ0 सीमा द्विवेदी, डॉ0 प्रभा गुप्ता, डॉ0 सीता त्रिपाठी, डॉ0 रक्षा गुप्ता, डॉ0 देवदत्त शुक्ला सहित समस्त शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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