न्याय धारा/ कानपुर नगर। गुरुवार 15 अक्टूबर 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य दक्षिणायन (शारदीय नवरात्र), आश्विन मास शुक्ल पक्ष की पंचमी, शरद ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान, कानपुर में 91वाँ स्थापना दिवस और C.P.C.B. Charter - 2.0 पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन हुआ। समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, सांसद रमेश अवस्थी, विधायक श्रीमती नीलिमा कटियार और चीनी एवं वनस्पति तेल निदेशालय, भारत सरकार के निदेशक अरविन्द कुमार रावत उपस्थित रहे। संस्थान की निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने अतिथियों का स्वागत किया।
माननीया राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने वर्चुअल माध्यम से संस्थान के योगदान की सराहना करते हुए गन्ना उत्पादकता बढ़ाने, गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने और आधुनिक कृषि तकनीकों को खेतों तक पहुँचाने पर जोर दिया। उन्होंने उद्योग से जल-वायु प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा दक्षता पर ध्यान देने तथा विद्यार्थियों से वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया।
सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि 1936 में स्थापित यह संस्थान कानपुर की औद्योगिक और शैक्षणिक पहचान को मजबूत कर रहा है। उन्होंने उन्नत किस्मों, वैज्ञानिक खेती और टिकाऊ कृषि पर बल दिया तथा उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से अनुसंधान को व्यावहारिक समाधान में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "किसान समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा।"
विधायक श्रीमती नीलिमा कटियार ने बताया की संस्थान कानपुर का गौरव है एवं चीनी, एथेनॉल एवं उर्जा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
निदेशक प्रो. सीमा परोहा ने बताया कि संस्थान ने उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद (UPCSR) के साथ नई गन्ना किस्मों और प्रजनक बीजों के लिए MoU किया है । संस्थान प्रतिवर्ष लगभग 300 से 350 प्रशिक्षित तकनीकी विशेषज्ञ तैयार कर रहा है। उन्होंने किसानों को समय पर भुगतान, लागत में कमी और एथेनॉल व बगास से बिजली जैसे प्रयासों से ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की बात कही ।
CPCB Charter-2.0 पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने संगोष्ठी को जल संरक्षण, अपशिष्ट जल उपचार और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
प्रगतिशील किसान सम्मान समारोह में देश के विभिन्न राज्यों के 13 प्रगतिशील गन्ना किसानों को उनकी उत्कृष्ट उपज के लिए सम्मानित किया गया । लखीमपुर (उ.प्र.) के श्री अचल कुमार मिश्रा ने सर्वाधिक 3,296 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त की । शाहजहाँपुर के श्री कौशल कुमार मिश्रा (2,630), नरसिंहपुर (म.प्र.) के श्री उपेंद्र कौरव (1,538) और सरगुजा (छत्तीसगढ़) के श्री भोला शंकर सिंह (1,520 ) क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज भी उल्लेखनीय रहे।
पूर्व छात्र सम्मान समारोह में संस्थान के सात विशिष्ट पूर्व छात्रों को चीनी, डिस्टिलरी, गन्ना और बायोएथेनॉल उद्योग में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया । सम्मानित विभूतियों में श्री योगेश कुमार सिंह, श्री बृज मोहन, डॉ. अशोक कुमार, श्री आर. नंदा कुमार, श्री के.के. बाजपेई, श्री राजीव नयन ठाकुर और श्री वी. सुब्बु रथीनाम शामिल हैं। इन सभी को शर्करा उद्योग में 30 से 50 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
इनकी उपलब्धियों में ग्रीनफील्ड चीनी संयंत्रों, कोजेन परियोजनाओं और डिस्टिलरी का कमीशनिंग, चीनी रिकवरी और उत्पादन क्षमता में वृद्धि, बैकएंड रिफाइनरी परियोजना, तथा गन्ना विकास में उन्नत प्रजातियों व टिश्यू कल्चर का उपयोग शामिल है। साथ ही बायोगैस, DDGS और ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) जैसी टिकाऊ तकनीकों को अपनाने तथा उन्नयन में भी इनका अधिक योगदान रहा
कई विभूतियों को पूर्व में भी STAI रजत पदक, लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और "बेस्ट यूनिट हेड" जैसे सम्मान मिल चुके हैं । ये सभी NSI की उत्कृष्ट परंपरा और भारतीय चीनी एवं बायोएथेनॉल उद्योग में पूर्व छात्रों की अहम भूमिका को दर्शाते हैं ।

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