न्याय धारा/ कानपुर नगर। बुधवार 02 सितम्बर 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। भारतीय बाल-कल्यान संस्थान, कानपुर में 30 अगस्त को आयोजित 65वां बाल- साहित्यकार सम्मान समारोह में देश के 11 प्रमुख बाल- साहित्यकारों को उनके बाल- साहित्य में साहित्यिक अवदान के लिए सम्मानित किया गया। संस्थान के अध्यक्ष आदरणीय भूधर नारायण मिश्र, पूर्व विधायक एवं कॉंग्रेस के वरिष्ठ नेता ने देश के विभिन्न प्रांतों से आए बाल-साहित्यकारों एवं बच्चों को सम्मानित किया।
पं0 भूधर नारायण मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि डॉo राष्ट्रबंधु, बाल-साहित्य के पितामह द्वारा स्थापित बाल-कल्याण संस्थान अपनी ऊंचाईयों को स्पर्श कर राष्ट्र के साहित्यकारों एवं बच्चों को प्रेरणा का श्रोत बन रहा है।
संस्थान के महामंत्री एसo बी शर्मा जी ने अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि /मुख्य संरक्षक का आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि आपके तन-मन-धन से संस्था चल रही है। आपके इस योगदान के लिए संस्था हृदय से आभारी है। साथ में विद्यालय के संचालक प्रेम चंद्र गुप्त, डॉक्टर विनीत चंद्रा, मदन चंद कपूर आदि के योगदान की भी भरपूर सराहना की।
इस अवसर पर श्री शर्मा की बाल-साहित्य की पुस्तक 'हम भी सैनिक बन जाएंगे' (प्रकाशनाधीन ) प्रथम संस्करण का विमोचन हुआ। अपने व्यस्तताओं के साथ कठिन परिश्रम के साथ श्री शर्मा जी ने बच्चों की पुस्तक की रचना की। ज्ञातव्य है, कि आप विद्यादानी हैं और बच्चों के बीच रहते हैं पुस्तक विमोचन के अवसर पर संस्थान के उपाध्यक्ष डॉo लक्ष्मी शंकर कुशवाहा (बाल-नाट्यशास्त्र में पीएचo डीo की उपाधि प्राप्त) ने बताया, कि इस पुस्तक में पाँच बाल-कहानियाँ हैं। पुस्तक पर चर्चा और समीक्षा आगामी बाल-दिवस पर इसी संस्थान के द्वारा प्रस्तावित है।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉo भगवती प्रसाद द्विवेदी वरिष्ठ बाल-साहित्यकार ने अपने संबोधन में कहा, कि भारतीय बाल-कल्याण संस्थान का पैंसठवाँ सम्मान समारोह इतिहास रचने वाला आयोजन है, जिसके लिए मैं संस्था के सम्मानित अध्यक्ष एवं 'वन मैन आर्मी' की तरह समर्पित महामंत्री एस.बी.शर्मा और सभी सम्बद्ध रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएंँ संप्रेषित करता हूंँ। आज़ इस संस्थान के संस्थापक डॉ राष्ट्रबंधु की शिद्दत से याद आ रही है, जो सिर्फ़ पुरोधा बालसाहित्यकार ही नहीं, बल्कि सही अर्थों में सांस्कृतिक योद्धा थे। उन्होंने तमाम भारतीय भाषाओं के बालसाहित्यकारों को जोड़ने में सेतु की भूमिका अदा की थी और 'बालसाहित्य समीक्षा' का लम्बे अरसे तक संपादन कर एक इतिहास रचा था। उन्होंने बाल-साहित्यकारों पर केंद्रित विशेषांकों की झड़ी लगा दी थी और बालसाहित्यकारों पर जितने विशेषांक उस पत्रिका ने प्रकाशित किए, आज़ तक किसी पत्रिका ने नहीं किया। उस पत्रिका में उनके प्राण बसते थे।
यदि 'बाल-साहित्य-समीक्षा' का पुनर्प्रकाशन हो सके, तो यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मैं उनकी पावन स्मृति को सादर प्रणामांजलि अर्पित करता हूंँ। दरअसल बाल-साहित्य की साधना ईश्वरीय आराधना है और लेखन की कसौटी भी है। युवा पीढ़ी इस दिशा में प्रयासरत है, पर इसमें बच्चों से सरोकार बनाने और गहरे डूबकर गोताखोर की भांँति बाल-साहित्य के मोती चुनने की ज़रूरत है। मैं इस संस्थान के प्रति बहुआयामी साहित्यकार चक्रधर शुक्ल और डॉ लक्ष्मीशंकर कुशवाहा जी के योगदान की भी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूंँ। हमारी कोशिश होनी चाहिए, कि बच्चे दबाव-तनाव से बाहर आएँ और उनके चेहरे पर हँसी-मुस्कान लौट आए।
बाल-साहित्यकारों के सम्मान के अवसर पर मुख्य अतिथि, संस्थान के अध्यक्ष और संरक्षक मदन चंद कपूर, प्रेम चंद्र गुप्ता एवं महामंत्री एस बी शर्मा ने कहा कि डॉ. अनीता सेठिया के साहित्यिक योगदान तथा तन-मन-धन से संस्थान की सहायता एवं अपने पिता श्री (भाल चंद सेठिया) की स्मृति में कई वर्षों से उपस्थिति होकर पुरस्कार प्रदान करती आ रहीं हैं। स्वस्थ्य कारणों से इस वर्ष कार्यक्रम में उपस्थित होने में असमर्थ रहीं हैं। उन्हीं के द्वारा डॉक्टर शील कौशिक को पुरस्कार प्रदान किया गया है। हम सभी उनके योगदान की सराहना करते हैं।
अपने सम्बोधन में डॉo शील कौशिक, वरिष्ट बाल साहित्यकार ने कहा कि बाल- साहित्य बच्चों तक पहुँचना चाहिए। इसके लिए मैं कार्य- शालाओं का आयोजन भी करती हूँ। योगेन्द्र प्रताप मौर्य, जौनपुर ने कहा कि बाल- साहित्यकारों की लेखन से बच्चों को प्रेरणा मिले; ऐसा बाल साहित्य सृजन होकर बच्चों तक पहुँचना चाहिए। संस्थान के महामंत्री श्री शर्मा जी ने संस्थान की स्मारिका विमोचन करने के साथ अपने विस्तृत संबोधन में संस्थान की स्थापना लेकर इस सम्मान समारोह वर्ष 2026 तक के सफर पर प्रकाश डाला।
डॉo आदित्य कुमार कटियार 'अजीब' कानपुर ने संस्था के सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद देते हुए विशेष रूप से अध्यक्ष आदरणीय भूधर नारायण मिश्र जी व महामन्त्री एस बी शर्मा जी का आभार व्यक्त किया। तत्पश्चात प्रकृति के रूप का वर्णन करती हुई एक बाल कविता (थोड़ी बारिश थोड़ी धूप) भी प्रस्तुत की।
कानपुर के सुविख्यात वरिष्ठ साहित्यकार एवं शिक्षक डॉक्टर सुरेश अवस्थी, वरिष्ठ कवि हरीलाल 'मिलन' नंद किशोर मिश्रा, प्रधानाचार्य, जय नारायण विद्या मंदिर-कानपुर, नीरज शास्त्री- मथुरा, डॉo शील कौशिक- हरियाणा, मेजर शक्ति राज, देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव-बस्ती, डॉक्टर जय प्रकाश प्रजापति, रमेश दीक्षित, सुश्री अल्का प्रमोद -लखनऊ, योगेन्द्र प्रताप मौर्य-जौनपुर, श्याम मोहन मिश्रा गोला गोकर्णनाथ-खीरी, सुनीता तिवारी -कानपुर, उदय नारायण उदय, उपेंद्र शुक्ला, अजीत सिंह राठौर, राज कुमार सचान,
युवा कवि अविनाश अवस्थी, मंजूलता श्रीवास्तव, राम प्रसाद, डॉक्टर आदित्य कटियार 'अजीब', भारत भूषण तिवारी, पूर्व उप- सम्पादक, बाल-साहित्य समीक्षा, अनिल अवस्थी, सहित गणमान्य लोग एवं कार्यक्रम में सम्मानित हुए छात्र एवं छात्राएँ भी उपस्थित रहे।
इस कार्यक्रम में 14 टापर छात्र-छात्राओं (हाई स्कूल/इंटर आदि) को सम्मानित किया गया। संस्थान के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कवि चक्रधर शुक्ल ने कविताओं का पाठ एवं संचालन किया। भारत भूषण तिवारी के सहयोग के लिए धन्यवाद। कुमारी मानसी मिश्रा, अधिवक्ता ने बड़े मनोयोग से कार्यक्रम एवं संचालन में सहयोग किया। श्री शर्मा जी ने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों एवं श्रोताओं का स्वागत, अभिनंदन और हार्दिक आभार व्यक्त किया। साथ ही समापन के अवसर पर कार्यक्रम की सफलता के लिए एवं सभी के सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

addComments
एक टिप्पणी भेजें