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44 दिन बाद सराय अमिलिया लौटा विनोद का पार्थिव अवशेष, डीएनए रिपोर्ट से हुई पहचान

अरुणाचल के सैलाब में 14 अगस्त से थे लापता, 5वीं ग्रेनेडियर के जवान की अस्थियां पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम

न्याय धारा/ अजीतमल (औरैया)। शनिवार 26 सितम्बर 2026 (सूत्र/दीपक अवस्थी/संवाददाता) सूर्य दक्षिणायन (पितृ पक्ष), भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर।
अरुणाचल प्रदेश के दिबांग वैली में 14 अगस्त को आई अचानक बाढ़ में लापता हुए सराय अमिलिया निवासी सेना के जवान विनोद यादव की 44 दिन बाद पहचान हो सकी। डीएनए जांच रिपोर्ट के आधार पर शनिवार को उनकी पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद सेना की ओर से उनकी अस्थियां परिजनों को सुपुर्द की गईं।

अस्थियां गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। लंबे समय से बेटे की सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए बैठे मां सुनीत देवी, पिता महेंद्र यादव और भाई अभिषेक की आंखों से आंसू छलक पड़े। गांव में भी शोक की लहर दौड़ गई।

14 अगस्त को सैलाब में बह गया था सेना का कैंप। बताया गया कि 14 अगस्त की शाम करीब 4:30 बजे दिबांग वैली जिले के पाशु पानी स्थित सेना के कैंप में भारी बारिश और बादल फटने के बाद अचानक बाढ़ आ गई थी। तेज बहाव की चपेट में सेना के दो शेल्टर बह गए थे। कैंप में मौजूद सात जवान भी बाढ़ के पानी में बह गए थे। इनमें दो जवानों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 5वीं ग्रेनेडियर में तैनात विनोद यादव समेत पांच जवान लापता हो गए थे।

हादसे के बाद सेना की ओर से लापता जवानों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

अग्निवीर भर्ती के शुरुआती बैच में शामिल हुए थे विनोद सराय अमिलिया निवासी विनोद यादव पुत्र महेंद्र यादव अग्निवीर योजना के शुरुआती बैच में सेना में भर्ती हुए थे। वर्तमान में वह 5वीं ग्रेनेडियर में तैनात थे। उनके परिवार में मां सुनीत देवी, पिता महेंद्र यादव और छोटा भाई अभिषेक हैं। पिता किसान हैं।विनोद के लापता होने के बाद से परिवार लगातार सेना और प्रशासन से मिलने वाली हर सूचना का इंतजार कर रहा था। ग्रामीण भी परिवार के संपर्क में रहे और जवान की सकुशल वापसी की प्रार्थना करते रहे।

सेना समेत कई एजेंसियों ने चलाया तलाशी अभियान

लापता जवानों की तलाश में सेना की खोज एवं बचाव टीमों के साथ आईटीबीपी, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें भी जुटी रहीं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में सेना की एविएशन यूनिट की मदद से संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई।

लगातार बारिश, दुर्गम पहाड़ी भूभाग और तेज पानी के बहाव के कारण सर्च ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण रहा। इसके बावजूद सुरक्षा बलों की टीमें लगातार अभियान चलाती रहीं।

डीएनए रिपोर्ट से हुई पहचान

तलाशी अभियान के दौरान बरामद अवशेषों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराई गई। 26 सितंबर को डीएनए रिपोर्ट के आधार पर विनोद यादव की पहचान की पुष्टि हुई। इसके बाद सेना की ओर से उनकी अस्थियां परिजनों को सुपुर्द की गईं।

अस्थियां घर पहुंचते ही परिवार का धैर्य टूट गया। मां और अन्य परिजन फफक पड़े। 44 दिनों से बेटे के लौटने की उम्मीद लगाए परिवार के लिए यह पल बेहद भावुक कर देने वाला रहा।

गांव में छाया शोक

विनोद के लापता होने के बाद से सराय अमिलिया के ग्रामीण सेना की हर सूचना पर नजर बनाए हुए थे। ग्रामीण लगातार परिवार को ढांढस बंधाते रहे। अब डीएनए रिपोर्ट से पहचान की पुष्टि होने के बाद गांव में मातम पसरा है। वहीं हादसे में लापता हुए अन्य जवानों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है।

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