न्याय धारा/ कानपुर नगर। सोमवार 03 अगस्त 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, श्रावण मास कृष्ण पक्ष की पंचमी, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू), कानपुर लगातार शिक्षा, शोध और डिजिटल नवाचार के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को बढ़ावा देने और शिक्षकों की वैश्विक अकादमिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल करते हुए स्कूल ऑफ टीचर एजुकेशन के सहायक आचार्य एवं द्रोणाचार्य सेंटर फॉर ऑनलाइन एंड डिस्टेंस एजुकेशन (D-CODE) के उप निदेशक (तकनीकी) डॉ. विमल सिंह ने अपनी व्यक्तिगत अकादमिक पोर्टफोलियो वेबसाइट विकसित की है। यह वेबसाइट आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों की सहायता से तैयार की गई है, जहाँ शोध, शिक्षण और नवाचार से जुड़ी उनकी समस्त उपलब्धियाँ एक ही मंच पर उपलब्ध हैं।
माननीय कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि आज के समय में विश्वविद्यालयों की पहचान केवल कक्षाओं और परीक्षाओं से नहीं, बल्कि शोध, नवाचार और डिजिटल नेतृत्व से भी होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की ऐसी डिजिटल पहल न केवल उनकी व्यक्तिगत शैक्षणिक पहचान को मजबूत करती है, बल्कि विश्वविद्यालय की शोध संस्कृति को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाती है।
www.drvimalsingh.in नामक इस वेबसाइट पर डॉ. विमल सिंह के शोध पत्र, पुस्तकें, संपादित पुस्तकें, पेटेंट, कॉपीराइट, ई-कंटेंट, व्याख्यान वीडियो, आमंत्रित व्याख्यान, शोध प्रभाव (Research Impact), पुरस्कार, अकादमिक उपलब्धियाँ, व्यावसायिक दायित्व तथा विभिन्न शोध प्रोफाइल एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों तथा देश-विदेश के शोधकर्ताओं को उनके अकादमिक कार्यों तक सरल और त्वरित पहुँच मिलेगी।
वेबसाइट पर मौजूद AI आधारित चैटबॉट डॉ. विमल सिंह की शैक्षणिक यात्रा, शोध क्षेत्रों, प्रकाशनों, पुस्तकों, विशेषज्ञता, पुरस्कारों और अन्य उपलब्धियों के बारे में संवादात्मक शैली में तुरंत जानकारी उपलब्ध कराता है। इससे वेबसाइट केवल सूचना देने वाला मंच नहीं, बल्कि एक इंटरएक्टिव डिजिटल अकादमिक सहायक बन गई है।
डॉ. विमल सिंह ने बताया कि वेबसाइट का प्रारंभिक विकास Emergent AI की सहायता से किया गया, जिसे आगे Vercel AI के माध्यम से और अधिक उन्नत बनाया गया। वेबसाइट का तकनीकी बैकएंड GitHub पर आधारित है तथा इसके नियमित अद्यतन में Google Antigravity AI का उपयोग किया जा रहा है। उनका कहना है कि उद्देश्य केवल एक वेबसाइट बनाना नहीं था, बल्कि ऐसा डिजिटल अकादमिक इकोसिस्टम विकसित करना था, जहाँ शोध, नवाचार, शिक्षण और तकनीक एक साथ दिखाई दें।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में किसी शोधकर्ता की जानकारी विभिन्न प्लेटफॉर्मों पर बिखरी रहती है। इस वेबसाइट के माध्यम से Google Scholar, Scopus, ORCID, VIDWAN, ResearchGate, LinkedIn और GitHub जैसे सभी प्रमुख अकादमिक प्लेटफॉर्म एक ही स्थान पर जोड़ दिए गए हैं, जिससे शोध सहयोग और वैश्विक नेटवर्किंग को भी बढ़ावा मिलेगा।
डॉ. विमल सिंह ने कहा कि यह वेबसाइट उनके व्यक्तिगत शैक्षणिक जीवन का दस्तावेज़ भर नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों और युवा शिक्षकों के लिए एक प्रेरणास्रोत भी है। उन्होंने इसे अपने गुरुजनों, विद्यार्थियों और शिक्षा समुदाय को समर्पित करते हुए कहा कि भविष्य में यह मंच शोध सहयोग, ज्ञान-साझाकरण और वैश्विक अकादमिक संवाद का माध्यम बनेगा।

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