न्याय धारा/ कानपुर नगर। गुरुवार 23 जुलाई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, बैशाख मास शुक्ल पक्ष की नवमी, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। आज ईश्वर प्रेम मिशन द्वारा गुरु पूर्णिमा सप्ताह के द्वितीय दिवस पर ईश्वर प्रेम आश्रम से कथा व्यास संत प्रतिमा प्रेम जी ने सृष्टि की रचना के बारे में बताते हुए कहा कि निराकार परमात्मा ने श्रष्टि की रचना हेतु नारायण की नाभि से दिव्य कमल पर आसीन श्रष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी उत्पन्न हुए एवं श्रष्टि को विस्तार देने के लिए भगवान शिव एवं विष्णु के सहयोग से सत्य, रज,तमोगुण की सहायता से जीव की रचना की।
सबसे पहले मन मानस पुत्रों सनक,सनातन सनन्दन, सनतकुमार को उत्पन्न किया।संसार को आगे बढ़ाने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने शरीर को दो भागों में विभाजित कर पुरुष के रूप में मनु और तस्त्री के रूप में शतरुपा को जन्म दिया। जीवन के अंतिम क्षणों में सबकुछ भूल कर केवल राम नाम स्मरण करें।
राजेंद्र अवस्थी ने बताया कि कथा श्रवण में प्रमुखरूप से जया, श्वेता, प्रीती पाण्डेय,सुरभि पाण्डेय,नेहा,सुमन, रमा,निर्मला, रीनू, सत्या, मीना, ज्योति, विभा, पिंकी दीक्षित,शोभा त्रिवेदी,किरण, सूचिता खन्ना, पी एन मिश्रा, डी पी अग्निहोत्री,कमलेश पाण्डेय,राज कुमार शर्मा,मयंक पाण्डेय,महेश अवस्थी,श्याम बिहारी शर्मा,आदि उपस्थित रहीं।

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