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कानपुर विश्वविद्यालय में "क्लाइमेट विदिन: लीगल फ्रंटियर्स ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड बियॉन्ड" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

न्याय धारा/ कानपुर नगर। सोमवार 20 जुलाई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, बैशाख मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के माननीय कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की प्रेरणा एवं  मार्गदर्शन में अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ द्वारा गीता अनुरागी फाउंडेशन एवं विवेकानंद स्टडी सर्किल, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में "क्लाइमेट विदिन: लीगल फ्रंटियर्स ऑफ क्लाइमेट चेंज एंड बियॉन्ड" विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों के स्वागत एवं सम्मान के साथ हुआ। स्कूल ऑफ लीगल स्टडीज़ की निदेशक डॉ. स्मृति रॉय ने अपने स्वागत वक्तव्य में जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर विभिन्न विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़े कानूनी एवं सामाजिक पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।

सीएसजेएमयू की डीन (इनोवेशन, एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्टार्टअप) एवं निदेशक (सस्टेनेबिलिटी) डॉ. शिल्पा देशपांडेय कायस्थ ने कहा कि सतत विकास केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक एवं संस्थागत विकास का भी महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय युवाओं में नेतृत्व क्षमता, नवाचार, टीमवर्क एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यक्रम की अतिथि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज एवं एलएलआरएच अस्पताल, कानपुर के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रतिमा वर्मा ने जलवायु परिवर्तन के मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों एवं पर्यावरण प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की। डॉ. प्रतिमा वर्मा ने बताया कि उन्होंने लगातार चार माह तक अपने घर में उपयोग होने वाले सिंगल-यूज़ प्लास्टिक और विभिन्न उत्पादों के रैपर एकत्र किए, जिसके बाद यह देखकर वे चिंतित हुईं कि केवल एक परिवार से ही इतनी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हो रहा है। तो देश की जितनी जनसंख्या है इसके अनुपात में हम सभी कितना धरती को प्रदूषित कर रहे हैं,उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण और बढ़ते प्लास्टिक अपशिष्ट का हमारी पीढ़ी और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाला प्रभाव अत्यंत चिंताजनक है। यही चिंता उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति अधिक संवेदनशील बनने और दूसरों को भी जागरूक करने के लिए प्रेरित करती है।

गीता अनुरागी फाउंडेशन के अध्यक्ष नागेंद्र मिश्रा ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। उन्होंने स्वयं, परिवार और समाज स्तर पर छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण "धरती को आया बुखार" शीर्षक पर आधारित नाटक रहा, जिसने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय संकट के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को जागरूक किया। इसके पश्चात आयोजित प्रस्तुतीकरण एवं संवाद सत्र में पर्यावरणीय कानूनों, उनके प्रभावी क्रियान्वयन, जनभागीदारी तथा युवाओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। सभी प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण,  जीवनशैली अपनाने तथा स्वच्छ, हरित एवं जिम्मेदार समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया।

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