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टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे सरकार - राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

न्याय धारा/ कानपुर नगर। रविवार 05 जुलाई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, बैशाख मास कृष्ण पक्ष की पंचमी, वर्षा ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर।  राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग), कानपुर नगर इकाई ने टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की सेवा सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की मांग को लेकर अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद माननीय देवेंद्र सिंह भोले को ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि 23 अगस्त 2010 को एनसीटीई द्वारा टीईटी को न्यूनतम शैक्षिक अर्हता घोषित किया गया था। इससे पूर्व उत्तर प्रदेश में नियुक्त हुए शिक्षकों की नियुक्तियां उस समय प्रभावी नियमों एवं निर्धारित योग्यता के आधार पर विधिवत की गई थीं। ऐसे शिक्षकों ने वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

महासंघ ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के बाद टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों में अपने भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है। संगठन का मानना है कि बाद में निर्धारित पात्रता मानकों को पूर्व में नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

महासंघ ने माननीय सांसद से अनुरोध किया है कि वे इस विषय को भारत सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाएं तथा संसद में भी टीईटी लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा अधिकार, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य वैधानिक लाभों की सुरक्षा सुनिश्चित कराने हेतु आवश्यक विधायी एवं नीतिगत पहल करें।

संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार लाखों शिक्षकों एवं उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील एवं न्यायपूर्ण निर्णय लेकर उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

ज्ञापन देने में प्रमुख रूप से राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष चन्द्र दीप सिंह यादव, डॉ शैलेंद्र द्विवेदी, डॉ राहुल मिश्रा, उमेश सिंह, डॉ पवन मिश्रा, रचना अवस्थी, धीरेंद्र सिंह, स्वतंत्र शर्मा, संगम साहू, आशुतोष निगम, राकेश पाल, रजनीश कुमार, दीपक वर्मा, आदित्य द्विवेदी, साकेत सिंह, कौशल किशोर, अंबरीश शुक्ला, अल्का गौड़ा, अनुपम त्रिवेदी, अनिल राय, अखिलेश शाहू, विवेक कटियार समेत दर्जनों शिक्षकगण मौजूद रहे।

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