न्याय धारा/ कानपुर नगर। शनिवार 13 जून 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, अधिक जेष्ठ मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (पुरुषोत्तम मास), ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर ऐकडेमिक में शनिवार को शेल्टर होम में निवासरत बच्चों एवं किशोर-किशोरियों के समग्र विकास, मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, कौशल विकास तथा सामाजिक पुनर्वास हेतु एक उच्चस्तरीय समीक्षा एवं कार्ययोजना बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक की अध्यक्षता मा.न्यायमूर्ति अजय भनोट (इलाहाबाद उच्च न्यायालय) एवं विश्वविद्यालय के मा.कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक द्वारा संयुक्त रूप से की गई। बैठक में कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी, जिला जज, मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिला जज सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने सहभागिता करते हुए शेल्टर होम में निवासरत बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित कार्यक्रमों की समीक्षा की तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक के दौरान मा.न्यायमूर्ति अजय भनोट ने विश्वविद्यालय द्वारा शेल्टर होम के बच्चों के लिए संचालित विभिन्न पहलुओं की सराहना करते हुए विशेष रूप से नैदानिक मनोविज्ञान विभाग द्वारा किए गए मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, व्यक्तिगत एवं समूह परामर्श, जीवन कौशल प्रशिक्षण, व्यवहार प्रबंधन, भावनात्मक अभिव्यक्ति तथा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों को अत्यंत उपयोगी एवं प्रभावी बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय के योग विभाग, फाइन आर्ट्स विभाग तथा नाट्य एवं रंगमंच विभाग को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से जोड़कर बच्चों के व्यक्तित्व विकास हेतु और अधिक कार्य करने का सुझाव दिया।
इस अवसर पर मा. कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा शेल्टर होम में निवासरत सभी किशोर एवं किशोरियों का विस्तृत मनोवैज्ञानिक प्रोफाइल तैयार किया गया है तथा नियमित काउंसलिंग एवं मनोसामाजिक हस्तक्षेपों के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन एवं सामाजिक समायोजन की क्षमताओं का विकास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट द्वारा शेल्टर होम के बच्चों के लिए छह माह का “फूड प्रोडक्शन एंड सर्विस सर्टिफिकेट प्रोग्राम” सफलतापूर्वक संचालित किया गया है। इसी प्रकार फैशन टेक्नोलॉजी विभाग द्वारा छह माह का “सर्टिफिकेट प्रोग्राम ऑन बेसिक सिलाई एवं परिधान निर्माण (Basic Sewing and Stitching)” संचालित किया गया, जिससे बच्चों को रोजगारपरक कौशल प्राप्त हुए हैं। कुलपति ने यह भी जानकारी दी कि माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल की अनुमति प्राप्त होने पर आगामी विश्वविद्यालय दीक्षांत समारोह में इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक पूर्ण करने वाले बच्चों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
मा. कुलपति प्रो. पाठक ने योग विभाग, फाइन आर्ट्स विभाग एवं नाट्य विभाग को निर्देशित किया कि वे योग, कला, सांस्कृतिक गतिविधियों, थिएटर, मोटिवेशनल स्टोरी टेलिंग, संचार कौशल एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति आधारित कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों के व्यक्तित्व विकास एवं आत्मविश्वास वृद्धि के लिए विशेष गतिविधियाँ संचालित करें। उन्होंने नैदानिक मनोविज्ञान विभाग एवं समाज कार्य विभाग को गत वर्ष किए गए हस्तक्षेपों के प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन एवं सामाजिक प्रभाव अध्ययन करने के निर्देश भी दिए।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, कौशल विकास एवं सामाजिक पुनर्वास को एकीकृत करते हुए शेल्टर होम के बच्चों के जीवन में सकारात्मक एवं स्थायी परिवर्तन लाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा भविष्य में भी इस प्रकार की जनहितकारी एवं समाजोन्मुख गतिविधियों को निरंतर आगे बढ़ाता रहेगा।
जिलाधिकारी कानपुर नगर जितेंद्र प्रताप सिंह ने विश्वविद्यालय एवं जिला प्रशासन के मध्य सतत समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि समय-समय पर संयुक्त समीक्षा बैठकें आयोजित कर कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने शेल्टर होम के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए नगर के प्रतिष्ठित विद्यालयों में प्रवेश सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए।
पुलिस आयुक्त कानपुर नगर रघुबीर लाल ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय की यह पहल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास, सामाजिक दक्षता एवं व्यावसायिक कौशल को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा उन्हें एक सम्मानजनक, स्वावलंबी एवं उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर करेगी।
बैठक में विश्वविद्यालय की ओर से डॉ. प्रियंका शुक्ला (विभागाध्यक्ष, नैदानिक मनोविज्ञान विभाग), डॉ. प्रशांत सिंह (सहायक प्रोफेसर, फैशन टेक्नोलॉजी विभाग), सिद्धार्थ सिंह (सहायक प्रोफेसर, स्कूल ऑफ होटल मैनेजमेंट), डॉ. राम किशोर (विभागाध्यक्ष, योग विभाग) तथा सुश्री सोनाली धनवानी (सहायक प्रोफेसर, योग विभाग) सहित अन्य शिक्षकों ने अपने-अपने विभागों द्वारा संचालित गतिविधियों एवं भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं।
बैठक का मुख्य उद्देश्य शेल्टर होम में निवासरत बच्चों को मानसिक, शैक्षणिक, सामाजिक एवं व्यावसायिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना तथा उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर भविष्य का निर्माण करना रहा।

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