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विवि में 'छत्रपति शाहू जी महाराज शोधपीठ' का जल्द होगी शोधपीठ की स्थापना

न्याय धारा/ कानपुर नगर। शुक्रवार 26 जून 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, शुद्ध जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की 152वीं जयंती के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के तात्या टोपे सभागार में आयोजित कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के मा. कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने समाज सुधार, सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए विश्वविद्यालय में "छत्रपति शाहू जी महाराज शोधपीठ (Chhatrapati Shahu Ji Maharaj Research Chair)" की स्थापना के लिये चार सदस्यीय स्पेशल टॉस्क फोर्स का गठन किया है।

स्पेशल टॉस्क फोर्स संचालन एवं कार्ययोजना के लिए प्रो. संदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रो.डी.सी. श्रीवास्तव, डॉ.अमित कुमार मिश्रा तथा डॉ.रश्मि गोरे को सदस्य नामित किया गया है। यह शोधपीठ की स्थापना, शोध गतिविधियों, शोध परियोजनाओं, प्रकाशनों, अभिलेखीकरण एवं अकादमिक कार्यक्रमों का संचालन करेगी। कुलपति जी ने शोध गतिविधियों के संचालन हेतु ₹10 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अकादमिक इकाई नहीं होगी, बल्कि राजर्षि शाहू जी महाराज के विचारों, दर्शन एवं लोककल्याणकारी कार्यों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले शोध का प्रमुख केंद्र बनेगी।

मा.कुलपति ने कहा कि राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज केवल एक प्रगतिशील शासक ही नहीं थे, बल्कि आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय, समान अवसर, शिक्षा, कृषि सुधार, सहकारिता आंदोलन, महिला सशक्तिकरण तथा जनकल्याणकारी शासन के अग्रदूत थे। उनके विचार आज भी नई शिक्षा नीति, समावेशी विकास और सामाजिक समानता के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों—कृषि, विधि, समाज विज्ञान, शिक्षा शास्त्र, प्रबंधन तथा अन्य संकायों—से आह्वान किया कि वे राजर्षि शाहू जी महाराज द्वारा शिक्षा, कृषि, सहकारिता, सामाजिक न्याय, प्रशासनिक सुधार, महिला अधिकार, आरक्षण व्यवस्था एवं जनकल्याण के क्षेत्र में किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर अंतर्विषयक (Interdisciplinary) शोध करें तथा यह अध्ययन करें कि उनके विचारों एवं नीतियों को वर्तमान सामाजिक, शैक्षिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था में किस प्रकार प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है।

माननीय कुलपति ने यह भी घोषणा की कि राजर्षि शाहू जी महाराज के जीवन एवं योगदान पर शोध करने वाले चयनित शोधार्थियों को ₹10,000 प्रतिमाह शोध अनुदान (Research Fellowship) प्रदान किया जाएगा, जिससे इस क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक शोध को प्रोत्साहन मिल सके।

साथ ही उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय में "राजर्षि शाहू जी महाराज ज्ञान कॉर्नर" (भौतिक एवं डिजिटल/वर्चुअल स्वरूप में) स्थापित किया जाए, जहाँ उनके जीवन, विचारों, ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुस्तकों, शोधपत्रों, दुर्लभ अभिलेखों एवं डिजिटल संसाधनों का सुव्यवस्थित संकलन उपलब्ध कराया जाएंगे।

इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय परिसर में "राजर्षि शाहू जी महाराज संग्रहालय (Museum)" स्थापित करने की भी घोषणा की गई, जिसमें उनके जीवन, सामाजिक आंदोलनों, ऐतिहासिक निर्णयों, शिक्षा एवं कृषि सुधारों, सामाजिक न्याय संबंधी पहलों तथा जनकल्याणकारी योजनाओं को आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। यह संग्रहालय विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आमजन के लिए प्रेरणा एवं अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र होगा।

विश्वविद्यालय द्वारा आने वाले समय मे शोधपीठ की स्थापना के बाद भविष्य में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानमालाओं, शोध परियोजनाओं, नीति अध्ययन, प्रकाशनों, अभिलेखीकरण तथा सामाजिक नवाचार से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज के विचारों को व्यापक स्तर पर प्रसारित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगी।

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