न्याय धारा/ कानपुर नगर। शनिवार 06 जून 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, अधिक जेष्ठ मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी (पुरुषोत्तम मास), ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में जनभागीदारी अभियान के अंतर्गत क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन हेतु सक्रिय खोज (एक्टिव केस फाइंडिंग) एवं स्क्रीनिंग शिविर का आयोजन शनिवार को किया गया। यह शिविर विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों में संलग्न श्रमिकों की स्वास्थ्य जांच एवं क्षयरोग की समय रहते पहचान के उद्देश्य से स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज में स्थापित स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा फीता काटकर किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के एसोसिएट डीन (प्रशासन) डॉ. दिग्विजय शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि भारत को क्षयरोग मुक्त बनाने का संकल्प तभी सफल होगा जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति जागरूक होकर इस अभियान में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करेगा। उन्होंने विशेष रूप से दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि क्षयरोग एक गंभीर बीमारी अवश्य है, किंतु यह पूर्णत उपचार योग्य रोग है। यदि किसी व्यक्ति में क्षयरोग की पुष्टि होती है तो उसे घबराने की आवश्यकता नहीं है। चिकित्सकों के मार्गदर्शन में नियमित एवं पूर्ण उपचार प्राप्त करके वह पूर्णतः स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि अनेक लोग सामाजिक संकोच अथवा जानकारी के अभाव में समय पर जांच नहीं कराते, जिसके कारण रोग बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
उन्होंने योग, प्राणायाम एवं संतुलित पोषणयुक्त आहार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ जीवनशैली शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ बनाती है। जब शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत होती है तो वह अनेक संक्रामक रोगों, विशेष रूप से क्षयरोग के संक्रमण से स्वयं की बेहतर सुरक्षा कर सकता है। उन्होंने सभी श्रमिकों एवं उपस्थित जनसमुदाय से नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम तथा संतुलित आहार को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। जनपद क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुबोध प्रकाश ने प्रधानमंत्री क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि देश को क्षयरोग मुक्त बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर सक्रिय खोज एवं स्क्रीनिंग शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।
इन शिविरों का उद्देश्य ऐसे रोगियों की पहचान करना है जिनमें क्षयरोग के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, किंतु वे संक्रमण से प्रभावित होते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर पहचान एवं समुचित उपचार से न केवल रोगी को स्वस्थ किया जा सकता है, बल्कि संक्रमण के प्रसार को भी रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार द्वारा उपचाररत क्षयरोगियों को पोषणयुक्त आहार हेतु प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे उनके स्वास्थ्य लाभ में सहायता मिलती है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने कहा कि यदि जांच के दौरान कोई व्यक्ति क्षयरोग से प्रभावित पाया जाता है तो उसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। चिकित्सकों द्वारा निर्धारित उपचार को पूर्ण अनुशासन और नियमितता के साथ पूरा करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई बार रोगी प्रारंभिक सुधार के बाद दवाओं का सेवन बीच में ही बंद कर देते हैं, जिससे रोग पुनः गंभीर रूप धारण कर सकता है। उन्होंने सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने एवं अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को निरंतर मजबूत बनाए रखने का संदेश दिया। वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि आयुर्वेद आधारित जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या तथा प्राणायाम के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि केवल रोगमुक्त होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्वस्थ बने रहने के लिए रोग प्रतिरोधक क्षमता को निरंतर सुदृढ़ बनाए रखना भी आवश्यक है। इसके लिए आयुर्वेदिक सिद्धांतों के अनुरूप आहार-विहार तथा नियमित योग एवं प्राणायाम का अभ्यास अत्यंत लाभकारी है। संस्थान की वरिष्ठ सहायक आचार्या डॉ. वर्षा प्रसाद ने क्षयरोग से बचाव एवं उपचार के दौरान प्रमुख सावधानियों पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि पुष्टाहार और नियमानुसार दवाओं के सेवन से पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुनीश रस्तोगी, निदेशक, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज ने सभी अतिथियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। शिविर में विश्वविद्यालय परिसर में कार्यरत निर्माण श्रमिकों की क्षयरोग संबंधी स्क्रीनिंग एवं स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। कार्यक्रम में स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के शिक्षकगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएँ एवं बड़ी संख्या में श्रमिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. राम किशोर, सहायक आचार्य द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्थान की सहायक निदेशिका डॉ. हिना वैश्य एवं शिक्षकगण डॉ. चन्द्रशेखर कुमार, आमिना जैदी, संतोष कुमार यादव, विश्वदीप मिश्रा, डॉ. मोहित कुमार, सुश्री खुशबू अंजुम, यशवी गुप्ता,अमिल अग्रवाल, विनय कुमार शाह, वीरेन्द्र कुमार मौर्य, रेशू यादव, शिवम कुमार,कल्पना वर्मा, पूजा घोष, घुंघरू रानी तथा नितीष वर्मा आदि लोग उपस्थित रहे।

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