न्याय धारा/ कानपुर नगर। रविवार 28 जून 2026 (सूत्र/सूवि /पीआईबी /संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, शुद्ध जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। वर्तमान समय में बढ़ते तनाव, चिंता और मानसिक दबाव के बीच कला आत्म-अभिव्यक्ति, मानसिक शांति एवं सकारात्मक जीवनशैली का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स द्वारा "सर्टिफिकेट कोर्स – मूर्तिकला एवं पॉटरी/टेराकोटा" संचालित किया जा रहा है। यह कोर्स प्रतिभागियों को कला के साथ-साथ आर्ट थेरेपी के माध्यम से तनावमुक्त जीवन की ओर प्रेरित करेगा।
संस्थान के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने बताया कि मिट्टी के साथ सृजनात्मक कार्य करने से व्यक्ति की कल्पनाशक्ति, एकाग्रता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन का विकास होता है। आज विश्वभर में आर्ट थेरेपी को मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। मिट्टी को आकार देते हुए व्यक्ति अपनी भावनाओं को सहज रूप से अभिव्यक्त करता है, जिससे मानसिक तनाव कम होता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।
कोर्स समन्वयक जीऊत बली यादव, सहायक आचार्य, ने बताया कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को अनुभवी प्रशिक्षकों के निर्देशन में पॉटरी (फ्लावर पॉट निर्माण), टेराकोटा, सिरेमिक कला, मिट्टी से मूर्ति निर्माण, पोर्ट्रेट मॉडलिंग, क्राफ्ट निर्माण सहित मूर्तिकला के विभिन्न आयामों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही कला समीक्षा, कलात्मक लेखन एवं कला के सैद्धांतिक पक्षों की भी जानकारी प्रदान की जाएगी।
उन्होंने बताया कि इस कोर्स की विशेषता यह है कि इसमें आयु की कोई सीमा नहीं है। सीखने की कोई उम्र नहीं होती। विश्वविख्यात साहित्यकार Rabindranath Tagore ने लगभग 65 वर्ष की आयु में चित्रकला सीखना प्रारंभ किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनका जीवन प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रेरणा है कि नई शुरुआत किसी भी आयु में की जा सकती है।
विश्वविद्यालय का प्राकृतिक एवं हरित परिसर, वृक्षों और पुष्पों से सुसज्जित शांत वातावरण तथा 500 से अधिक कला विद्यार्थियों के बीच सीखने का अवसर इस कोर्स को और अधिक विशेष बनाता है। यह प्रशिक्षण केवल कलाकार बनने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि गृहिणियों, नौकरीपेशा व्यक्तियों, वरिष्ठ नागरिकों तथा कला में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी है।
इस कोर्स में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल (10वीं) उत्तीर्ण निर्धारित की गई है। कोर्स शुल्क मात्र ₹17,200 है। इच्छुक अभ्यर्थी शीघ्र ही इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर में संपर्क कर प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण कर सकते हैं।
संस्थान ने कला प्रेमियों एवं आम नागरिकों से इस अवसर का लाभ उठाने का आह्वान करते हुए कहा है कि यदि आप तनावमुक्त जीवन, सृजनात्मक अभिव्यक्ति और कला के माध्यम से अपने व्यक्तित्व का विकास करना चाहते हैं, तो यह सर्टिफिकेट कोर्स आपके लिए एक उत्कृष्ट अवसर है। मिट्टी के साथ सृजन की यह यात्रा न केवल एक नई कला सिखाएगी, बल्कि जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और नई दिशा भी प्रदान करेगी।

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