न्याय धारा/ कानपुर नगर। शनिवार 20 जून 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, शुद्ध जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स में माननीय कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक सर के मार्गदर्शन में आयोजित एक माह की ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला का समापन प्रतिभागियों द्वारा निर्मित कलाकृतियों की आकर्षक प्रदर्शनी एवं प्रमाण-पत्र वितरण समारोह के साथ सम्पन्न हुआ।
प्रदर्शनी में कार्यशाला के दौरान तैयार किए गए चित्रों, मृत्तिका शिल्पों, फ्लॉवर पॉट्स एवं अन्य कलात्मक कृतियों को प्रदर्शित किया गया, जिसकी उपस्थित अभिभावकों एवं कला प्रेमियों ने सराहना की।
कार्यशाला में बच्चों एवं युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए ड्राइंग, पेंटिंग, स्टिल लाइफ, लैंडस्केप, क्रिएटिव पेंटिंग, क्राफ्ट तथा अन्य कलात्मक विधाओं का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंतिम चरण में प्रतिभागियों को मृत्तिका कला के अंतर्गत क्ले मॉडलिंग एवं पॉटरी निर्माण की तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।कार्यक्रम के दौरान इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के निदेशक डॉ. मिठाई लाल ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता, लगन एवं परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि कला व्यक्तित्व विकास का एक प्रभावी माध्यम है तथा इस प्रकार की कार्यशालाएँ प्रतिभागियों की सृजनात्मक क्षमता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यशाला के समन्वयक डॉ. मंतोष यादव ने बताया कि एक माह तक संचालित इस कार्यशाला का उद्देश्य प्रतिभागियों में कलात्मक अभिरुचि एवं सृजनात्मक सोच का विकास करना था। उन्होंने कहा कि कला के माध्यम से व्यक्ति न केवल अपनी अभिव्यक्ति को सशक्त बनाता है, बल्कि मानसिक संतुलन एवं सौन्दर्यबोध का भी विकास करता है।
समापन समारोह में प्रतिभागी गार्वी वर्मा की माता श्रीमती अंजू वर्मा (डिप्टी लेवल कमिश्नर, कानपुर) एवं पिता श्री जितेन्द्र वर्मा (अकाउंट ऑफिसर, आर.एफ.सी., कानपुर) ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की कला कार्यशालाएँ बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक सभी आयु वर्ग के लोगों को मानसिक तनाव से मुक्त कर सृजनात्मक गतिविधियों से जोड़ती हैं। उन्होंने कहा कि कला व्यक्ति को आनंद, आत्मविश्वास एवं सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट्स के असिस्टेंट डायरेक्टर जे. बी. यादव, डॉ. रणधीर सिंह, डॉ. बप्पा माजी, प्रिया मिश्रा, कीर्ति वर्मा सहित अनेक शिक्षक, अभिभावक एवं प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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