न्याय धारा/ कानपुर नगर। रविवार 21 जून 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, शुद्ध जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। 12 वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के हेलीपैड मैदान में भव्य सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस वर्ष की वैश्विक थीम “Yoga for Healthy Ageing” के अनुरूप आयोजित इस कार्यक्रम में लगभग 700 प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर योग को स्वस्थ, सक्रिय एवं संतुलित जीवन का आधार बनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कानपुर के प्रांत प्रचारक श्रीराम जी ने योग की ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अनुपम देन है,जिसकी जड़ें वेदों में निहित हैं। उपनिषदों, पुराणों, भगवद्गीता, महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों से होते हुए योग आज आधुनिक युग में वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ विश्व के समक्ष स्थापित हो चुका है।
उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की पद्धति नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक विकास का समग्र विज्ञान है। वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी योग की उपयोगिता को स्वीकार कर रहा है और अनेक रोगों की रोकथाम एवं प्रबंधन में योग की महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध हो चुकी है।
साथ ही उन्होंने ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत को विश्व मंच तक पहुंचाने में स्वामी विवेकानंद का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय योग, वेदांत एवं आध्यात्मिक चिंतन को वैश्विक पहचान दिलाने का कार्य किया। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विश्व के करोड़ों लोगों को भारतीय संस्कृति एवं जीवन-दर्शन से जोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि योग मानवता को जोड़ने वाला माध्यम है और यह विश्व शांति, स्वास्थ्य एवं सद्भाव का मार्ग प्रशस्त करता है।
विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है, जिसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि योग आत्मानुशासन, व्यक्तित्व विकास एवं सकारात्मक जीवन दृष्टि का आधार भी है। सचिव, नीमा वूमेन फोरम उत्तर प्रदेश डॉ. वंदना पाठक ने अपने संबोधन में सभी प्रतिभागियों को नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि योग स्वस्थ एवं सुखी जीवन का सबसे सरल और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया।
प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने कहा कि विश्वविद्यालय में संचालित योग ओपीडी निरंतर समाज को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है और भविष्य में इसकी सेवाओं को और अधिक प्रभावी एवं व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वस्थ जीवन के लिए योग ओपीडी की सेवाओं का लाभ उठाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि योग आज केवल स्वास्थ्य का माध्यम नहीं बल्कि रोजगार, शोध एवं कैरियर की दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है। उन्होंने युवाओं को योग शिक्षा एवं योग चिकित्सा के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
इसके उपरांत नीमा के अध्यक्ष डॉ. नीरजा दुबे ने योग एवं समग्र स्वास्थ्य के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग वर्तमान समय की अनेक स्वास्थ्य चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। उन्होंने समाज में योग के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर बल दिया।
योगाचार्य डॉ. राघवेन्द्र चतुर्वेदी ने निर्धारित कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास कराया गया। योग सत्र में सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन, पदहस्तासन, अर्धचक्रासन, पवनमुक्तासन, सेतुबंधासन, मेरुदण्डासन, उत्तान मंडूकासन, भद्रासन, अनुलोम-विलोम, ध्यान एवं संकल्प मंत्र का सामूहिक अभ्यास कराया गया। कार्यक्रम संचालन योग प्रशिक्षिका सोनाली धनवानी व स्वागत डॉ रामकिशोर ने किया तथा कुलसचिव राकेश कुमार मिश्र ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में वित्त अधिकारी (F.O.) अशोक कुमार त्रिपाठी, प्रो.नीरज सिंह, डॉ वीके दुबे, मीडिया प्रभारी डॉ.दिवाकर अवस्थी, विभागाध्यक्ष डॉ. श्रवण कुमार यादव, हरीश शर्मा, डॉ. दिग्विजय शर्मा, अनिल कुमार यादव, छाया, सूरज यादव, विशाल सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षकगण, अधिकारीगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएं एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
इस अवसर पर नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा), राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी), ब्रह्माकुमारी, गायत्री परिवार, ईशा फाउंडेशन तथा अन्य सहयोगी संस्थाओं से जुड़े हुये लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान ब्रह्माकुमारी संस्था के प्रकाश , गायत्री परिवार के गोविंद बिहारी, इस्कॉन के अंकुर दास तथा एनसीसी के डॉ अंकित त्रिवेदी को तुलसी पादप भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा योग के प्रचार-प्रसार में दिए जा रहे योगदान की भी सराहना की गई।
वहीं योग पखवाड़े के अन्तर्गत नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन और NIMA विमेंस फोरम के द्वारा 120 से ज़्यादा ज़रूरतमंद महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई और उन्हें सूर्य नामस्कर, मेडिटेशन प्राणायाम में एक्सपर्ट बनाया गया। महिलाओं ने यूनिवर्सिटी OPD में योग और आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट पर अपने विचार दिए और पीठ दर्द, कंधे के दर्द, गर्दन के दर्द से छुटकारा दिलाने के लिए सभी को धन्यवाद दिया।

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