Customised Ads
दीनदयाल जी का सुत्रोक्त विचारों का संकलन किया जाना चाहिए : डॉ बाल मुकुंद पांडेय

न्याय धारा/ कानपुर नगर। बुधवार 06 मई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, जेष्ठ मास कृष्ण पक्ष की पंचमी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। इतिहास संकलन समिति, कानपुर प्रांत एवं दीनदयाल शोध संस्थान तथा सी.एस.जे.एम.विश्वविद्यालयकानपुर के संयुक्त तत्वावधान में आज विश्वविद्यालय परिसर स्थित दीनदयाल सभागार में एकल व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान “पंडित दीनदयाल उपाध्याय की इतिहास दृष्टि” विषय पर किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय जी दृष्टि में इतिहास का उद्देश्य केवल बीते हुए कल को याद करना नहीं था, बल्कि भविष्य के लिए 'धर्मराज्य' की स्थापना करना था। यहाँ धर्म का अर्थ संप्रदाय नहीं, बल्कि वह 'शाश्वत नियम' हैं जो समाज को जोड़कर रखता है। आगे उन्होंने कहा कि वास्तविक इतिहास वह है जो आम आदमी के उत्थान और उसकी सांस्कृतिक पहचान को स्वर दे।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. बालमुकुंद पाण्डेय (राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना, नई दिल्ली) ने अपने व्याख्यान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के इतिहास चिंतन को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय जी की इतिहास दृष्टि भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्र की आत्मा पर आधारित थी, जो समाज को एकात्मता के सूत्र में जोड़ती है। आगे उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी का मानना था कि इतिहास केवल राजाओं की वंशावली या युद्धों का विवरण नहीं है। उनके अनुसार, प्रत्येक राष्ट्र की एक अपनी आत्मा होती है, जिसे उन्होंने चित्ति कहा। भारत का इतिहास इसी 'चित्ति' की अभिव्यक्ति है। उन्होंने सिखाया कि इतिहास को इस दृष्टि से देखा जाना चाहिए कि हमारे राष्ट्र की आत्मा ने समय के साथ खुद को कैसे अभिव्यक्त किया। डॉ बाल मुकुंद पांडेय ने सभी इतिहासकारों, शिक्षाविदों से कहा कि वर्तमान समय में दीनदयाल जी के सुत्रोक्त विचारों का संकलन किया जाना चाहिए।

संजय "श्रीहर्ष"(राष्ट्रीय सह संगठन सचिव, अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना) ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की इतिहास दृष्टि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने और आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती है। वे चाहते थे कि हम इतिहास से केवल तथ्य न सीखें, बल्कि अपनी 'भारतीयता' को पहचानें। इतिहास संकलन समिति, कानपुर प्रांत के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. अनिल कुमार मिश्र ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद एवं उनके विचारों की वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में इतिहास संकलन समिति कानपुर प्रांत के अधिकारियों सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

टिप्पणियाँ