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सीएसजेएमयू में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षा, विज्ञान, सतत विकास एवं वैश्विक दृष्टिकोण पर हुआ गंभीर विमर्श

न्याय धारा/ कानपुर नगर। शनिवार 23 मई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, अधिक जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी (पुरुषोत्तम मास), ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर।  छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “लर्निंग फॉर टुमॉरो: इंटीग्रेटिंग एनवायरनमेंट, इक्विटी एंड सस्टेनेबिलिटी थ्रू एजुकेशन” का शनिवार को समापन हो गया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन सीएसजेएमयू के सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल में दो दिन से चल रहा था।

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शिक्षा, सतत विकास, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व तथा वैश्विक शैक्षिक परिदृश्य पर व्यापक एवं गंभीर विमर्श किया गया। जिसमें देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता करते हुए विचारों का आदान-प्रदान किया।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दो दिन में कुल पांच सत्र आयोजित हुए । जिसमें पहले दिन दो व दूसरे दिन तीन सत्र आयोजित हुए । शनिवार को कार्यक्रम की शुरूआत प्लेनरी सत्र से हुई । जिसमें विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रण कौल रहे । उन्होंने अपने व्याख्यान में शिक्षा को केवल ज्ञान हस्तांतरण की प्रक्रिया न मानकर मानवीय विकास, वैज्ञानिक चिंतन तथा सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्माण का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को स्थानीय आवश्यकताओं और वैश्विक चुनौतियों के मध्य संतुलन स्थापित करने की दिशा में कार्य करना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों में जिज्ञासा, नवाचार, अनुसंधान प्रवृत्ति तथा आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना नहीं, बल्कि विचारशील नागरिक तैयार करना होना चाहिए। 

सत्र के दौरान प्रतिभागियों द्वारा शिक्षा में वैश्विक सहयोग, अनुसंधान उन्मुख शिक्षण, प्रौद्योगिकी के उपयोग तथा सतत विकास के लक्ष्यों की प्राप्ति में शिक्षा की भूमिका पर सार्थक चर्चा की गई। आयोजन के दूसरे सत्र में ऑनलाइन व ऑफलाइन शोध पत्र प्रस्तुति किए गए । जिसमें विभिन्न राज्यों के विभिन्न विश्वविद्यालय के 220 शोध पत्रों का वाचन किया गया । सम्मेलन का तीसरा सत्र समापन सत्र आयोजित हुआ । जिसमें मुख्य अतिथि समाजशास्त्र विभाग ,भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर के प्रो. ए. के. शर्मा रहे । उन्होंने अपने संबोधन में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में समानता, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व विकसित करने का माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि सतत विकास की अवधारणा तभी सार्थक होगी, जब शिक्षा के माध्यम से समाज में पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक न्याय के मूल्यों को मजबूत किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जुड़कर अनुसंधान करने के लिए प्रेरित किया। आयोजन की विशिष्ट अतिथि प्रो. स्वीटी श्रीवास्तव, संयोजक (शिक्षा) एवं प्राध्यापक, डी.डब्ल्यू.टी.सी. ने शिक्षा में समावेशिता, गुणवत्तापूर्ण अधिगम एवं विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल परीक्षा-केंद्रित न बनाकर जीवनोपयोगी, संवेदनशील एवं व्यवहारिक दृष्टिकोण से समृद्ध बनाया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को विद्यार्थियों के मार्गदर्शक और प्रेरक के रूप में रेखांकित करते हुए शिक्षा में मानवीय मूल्यों के समावेशन की आवश्यकता बताई। आयोजन के विशिष्ट वक्ता प्रो.सुनील उपाध्याय, (विभागाध्यक्ष, शिक्षा विभाग, डी.बी.एस. कॉलेज )ने शिक्षा और सतत विकास के मध्य अंतर्संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक व्यवहारिक, संदर्भित एवं समाजोपयोगी बनाए जाने की आवश्यकता है। 

उन्होंने विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास को शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य बताया। वक्ताओं ने सम्मेलन के केंद्रीय विषय “पर्यावरण, समता और सतत विकास को शिक्षा के माध्यम से एकीकृत करना” को वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में अत्यंत प्रासंगिक बताते हुए कहा कि शिक्षा संस्थानों को ऐसे नागरिक तैयार करने होंगे, जो पर्यावरणीय संरक्षण, सामाजिक न्याय और सतत विकास के प्रति जागरूक एवं उत्तरदायी हों। इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विभिन्न शैक्षिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय विषयों पर आयोजित तकनीकी सत्रों, विचार-विमर्श एवं अकादमिक संवादों को प्रतिभागियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया । शोधार्थियों एवं प्रतिभागियों ने सम्मेलन के माध्यम से प्राप्त अनुभवों और नवीन दृष्टिकोणों को अपने शोध एवं शैक्षिक कार्यों में उपयोगी बताया। 

समापन सत्र के अंत में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सह संयोजक डॉ.गोपाल सिंह ने दो दिन के कार्यक्रम की रिपोर्ट पेश की । कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया । इस आयोजन में विभाग की निर्देशक डॉ.तनुजा भट्ट,डॉ.रश्मि गोरे,डॉ. रत्नार्थु मिश्रा,डॉ.बद्री नारायण मिश्र,डॉ.प्रियंका मौर्या,डॉ.विमल सिंह,डॉ.कल्पना अग्निहोत्री,अनुपमा यादव,डॉ.स्नेह पांडेय,प्रिया तिवारी,डॉ.कुंवर कुलदीप सिंह चौहान समेत काफी संख्या में शोधार्थी,विद्यार्थी मौजूद रहे ।

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