न्याय धारा/ कानपुर नगर। रविवार 24 मई 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, अधिक जेष्ठ मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी (पुरुषोत्तम मास), ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन कानपुर शाखा द्वारा “विश्व स्किजोफ्रेनिया दिवस – मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सामाजिक सहयोग का आह्वान ” के अवसर पर एक पत्रकार वार्ता का आयोजन आज दिनांक 24 मई 2026 दिन रविवार को दोपहर 12:00 बजे आईएमए कॉन्फ्रेंस हॉल कानपुर में किया गया।
इस पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ अनुराग मेहरोत्रा, डॉ. ए. सी. अग्रवाल चेयरमैन वैज्ञानिक सब कमेटी, उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ मनीष निगम, डॉ गणेश शंकर वरिष्ठ मनोचिकित्सक, डॉ विशाल सिंह वित्त सचिव एवं डॉ दीपक श्रीवास्तव वैज्ञानिक सचिव आईएमए कानपुर ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि - प्रति वर्ष 24 मई को विश्व स्तर पर ‘विश्व स्किजोफ्रेनिया जागरूकता दिवस’ (World Schizophrenia Awareness Day) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य समाज में इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना, भ्रांतियों को दूर करना तथा मानसिक रोगियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना है। इस अवसर पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, चिकित्सकों और सामाजिक संगठनों ने संयुक्त रूप से समाज से स्किजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्तियों के प्रति अपनी सोच बदलने और उन्हें आवश्यक सहयोग प्रदान करने की अपील की है।
स्किजोफ्रेनिया (Schizophrenia) एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से प्रबंधनीय (manageable) मानसिक विकार है। यह बीमारी मुख्य रूप से व्यक्ति की सोचने, महसूस करने, व्यवहार एवं वास्तविकता को समझने की क्षमता को प्रभावित करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में लाखों लोग इस स्थिति का सामना कर रहे हैं। भारत में भी इसका प्रसार व्यापक है। अक्सर गलतफहमी और जानकारी के अभाव के कारण मरीज सामाजिक बहिष्कार और उपेक्षा का शिकार हो जाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार स्किजोफ्रेनिया की समय पर पहचान एवं उचित उपचार से इसका प्रभावी नियंत्रण संभव है। दवाइयों, मनोचिकित्सा, पारिवारिक सहयोग एवं पुनर्वास सेवाओं की सहायता से रोगी सामान्य, सम्मानजनक एवं उत्पादक जीवन जी सकते हैं।
मुख्य बिंदु और संदेश:
भ्रांतियों को तोड़ना: स्किजोफ्रेनिया कोई लाइलाज बीमारी या ‘दोहरी personality (Split Personality)’ नहीं है। सही समय पर चिकित्सा और दवाओं की मदद से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।
लक्षणों को पहचानें: भ्रम होना, अवास्तविक आवाजें सुनाई देना, लोगों से दूरी बनाना तथा असामान्य व्यवहार इस बीमारी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर किसी न्यूरो-साइकिएट्रिस्ट (मनोचिकित्सक) से तुरंत परामर्श लेना चाहिए।
सरकारी पहल और सहायता: भारत सरकार राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (National Mental Health Programme - NMHP) और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बना रही है।
चिकित्सकों और विशेषज्ञों का मत:
मनोचिकित्सकों के अनुसार, “स्किजोफ्रेनिया के उपचार में दवाओं के साथ-साथ परिवार का भावनात्मक सहयोग (Family Support) सबसे बड़ी थेरेपी है। हमें इस बीमारी के प्रति डर और कलंक को समाप्त कर एक समावेशी (inclusive) समाज का निर्माण करना होगा।”
आमजन से अपील की जाती है कि मानसिक रोगों को कलंक की दृष्टि से न देखें तथा जरूरतमंद व्यक्तियों को उपचार हेतु प्रेरित करें। मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है।
“समझ, सहयोग और समय पर उपचार — स्किजोफ्रेनिया से लड़ाई का सबसे बड़ा आधार।”

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