न्याय धारा/ कानपुर नगर। मंगलवार 05 मई 2026 (सूत्र/सूवि /पीआईबी/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, जेष्ठ मास कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, ग्रीष्म ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता तथा समाज में मनोवैज्ञानिक सेवाओं की निरंतर बढ़ती आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग में शैक्षणिक सत्र 2026–27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है ।
क्लिनिकल साइकोलॉजी एवं संबंधित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें व्यावहारिक एवं पेशेवर कौशल से भी सशक्त बनाते हैं। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में सक्षम, संवेदनशील एवं प्रशिक्षित पेशेवर के रूप में तैयार करना है।
विभागाध्यक्ष डॉ.प्रियंका शुक्ला के अनुसार विभाग में स्नातक, परास्नातक एवं डिप्लोमा स्तर पर कई प्रमुख पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं । जिसमें बी.एससी. क्लिनिकल साइकोलॉजी (ऑनर्स) (RCI) में 20 सीटें उपलब्ध हैं तथा इसकी अवधि 4 वर्ष है। इसमें प्रवेश हेतु अभ्यर्थी का 10+2 विज्ञान वर्ग से उत्तीर्ण होना आवश्यक है। चयन प्रक्रिया में प्रवेश परीक्षा (MCQ) एवं साक्षात्कार शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम की विशेषता पूर्णकालिक क्लिनिकल प्रशिक्षण है, जिससे विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही वास्तविक केस हैंडलिंग, मनोवैज्ञानिक आकलन एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं का अनुभव प्राप्त होता है। यह कोर्स उन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी है जो भविष्य में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बनना चाहते हैं।
वहीं एम.ए. क्लिनिकल साइकोलॉजी (RCI) में 10 सीटें हैं और इसकी अवधि 2 वर्ष है। पात्रता के अंतर्गत 4 वर्षीय मनोविज्ञान स्नातक (न्यूनतम 55%, SC/ST हेतु 50%), अथवा 3 वर्षीय स्नातक के साथ 1 वर्षीय ब्रिज कोर्स, अथवा मनोविज्ञान में परास्नातक प्रथम वर्ष शामिल है। चयन प्रक्रिया में प्रवेश परीक्षा एवं साक्षात्कार होते हैं। यह पाठ्यक्रम उन्नत स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करता है, जिसमें मनोवैज्ञानिक परीक्षण, थेरेपी तकनीक, काउंसलिंग स्किल्स तथा शोध कार्य पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस कोर्स के पश्चात विद्यार्थियों के लिए अस्पतालों, मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों, पुनर्वास केंद्रों एवं निजी प्रैक्टिस में करियर के व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। वहीं बी.ए. मनोविज्ञान (ऑनर्स) में 50 सीटें हैं तथा इसकी अवधि 3 वर्ष है। इसमें किसी भी वर्ग से 10+2 उत्तीर्ण विद्यार्थी प्रवेश ले सकते हैं। चयन प्रक्रिया मेरिट आधारित है और CUET आवश्यक नहीं है।
यह पाठ्यक्रम मनोविज्ञान की मूलभूत अवधारणाओं को समझने के लिए एक सुदृढ़ आधार प्रदान करता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी मानव व्यवहार, व्यक्तित्व, संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं एवं सामाजिक मनोविज्ञान की गहन समझ विकसित करते हैं, जो आगे उच्च शिक्षा एवं विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में सहायक होती है। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एडवांस्ड साइकोलॉजी (ब्रिज कोर्स) में 10 सीटें हैं और इसकी अवधि 1 वर्ष है। इसके लिए मनोविज्ञान में स्नातक (न्यूनतम 55%, SC/ST हेतु 50%) आवश्यक है। चयन मेरिट के आधार पर किया जाता है। यह कोर्स विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है जो क्लिनिकल साइकोलॉजी में आगे बढ़ना चाहते हैं और उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवश्यक शैक्षणिक सेतु (ब्रिज) तैयार करना चाहते हैं। पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग में 40 सीटें हैं तथा इसकी अवधि 1 वर्ष है। किसी भी विषय में स्नातक अभ्यर्थी इसके लिए पात्र हैं और चयन मेरिट आधारित होता है। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को काउंसलिंग तकनीकों, करियर गाइडेंस, मानसिक स्वास्थ्य सहायता एवं व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान में दक्ष बनाता है। इसके माध्यम से स्कूल, कॉलेज, एनजीओ, कॉर्पोरेट सेक्टर एवं निजी काउंसलिंग प्रैक्टिस में रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
सभी पाठ्यक्रम पूर्णकालिक हैं तथा ऑफलाइन माध्यम में संचालित किए जाएंगे। विश्वविद्यालय द्वारा क्लिनिकल प्रशिक्षण, शोध एवं व्यावहारिक अनुभव पर विशेष बल दिया जाता है, जिससे विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने का अनुभव प्राप्त होता है। इन पाठ्यक्रमों को चुनने का प्रमुख लाभ यह है कि विद्यार्थी मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बढ़ती मांग के अनुरूप कौशल विकसित कर सकते हैं, समाज में सकारात्मक योगदान दे सकते हैं तथा एक सम्मानजनक एवं संतोषजनक करियर का निर्माण कर सकते हैं।

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