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जनता महाविद्यालय अजीतमल में प्रशिक्षण के दूसरे दिन कृषि संकाय के छात्र व छात्राओं ने सीखे जैविक कीटनाशी व जैविक उर्वरक बनाने के गुरवे

न्याय धारा/ औरैया। शनिवार 18अप्रैल 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, बैशाख मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा, बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। महाविद्यालय में जैविक कृषि को बढ़ावा देने की उद्देश्य से वीजामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, अग्नियास्त्र एवं पंचगव्य के निर्माण के लिए एक दो दिवसीय 17 व 18 अप्रैल को प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। 

इस कार्यक्रम में छात्रों को जैविक घोलों की तैयारी एवं उनके प्रयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी दी गयी। जैविक खेती विशेषज्ञ डॉ0 उमेश दुबे ने बताया की वीजामृत का उपयोग बीजों के उपचार के लिए किया जाता है जिससे फसल के रोगों से सुरक्षा मिलती है। 

डॉ0 योगेश कुमार साहू जी ने बताया जीवामृत मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक है इसके उपयोग से मृदा एवं मनुष्यों के स्वास्थ्य को सुधारा जा सकता है मृदा स्वास्थ्य होगी तो उससे बनने वाले उत्पाद भी गुणवत्ता युक्त होंगे वही डॉ0 धर्मेंद्र कुमार ने जैविक कीटनाशी नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र और अग्नियास्त्र के बनाने व उपयोग के बारे में बताया। डा0 उमाकांत मिश्र ने बताया पंचगव्य एक उत्तम वृद्धि प्रोत्साहक है और यह कम लागत में तैयार किया जा सकता हैं। जैविक उत्पाद से रासायनों का उपयोग कम किया जा सकता है, जिससे उत्पादन लागत कम हो जाती है।

वर्तमान समय में मिट्टी की गुणवत्ता में कृषि रसायनों के उपयोग के कारण लगातार गिरावट आ रही है, पर्यावरण प्रदूषण में वृद्धि हो रही है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इनको दृष्टिगत रखते हुए जैविक खेती के प्रति जन जागरूकता अभियान की आवश्यकता है। 

यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (ड0)अरविंद कुमार शर्मा ने जैविक खेती के लिए किसान आगे आये और इसको बढ़ावा मिले यह संदेश दिया साथ ही प्राचार्य जी ने विद्यार्थियों के लिए कहा कि स्टार्टअप के रूप में जैविक उत्पाद बनाकर शुरुआत कर सकते हैं। इस अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ पंकज द्विवेदी व अन्य शिक्षक साथी उपस्थित रहे।

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