न्याय धारा/कानपुर नगर। रविवार 29मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास शुक्ल पक्ष की एकादशी, बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित श्री हनुमान कथा के अंतिम दिन पूज्य विजय कौशल जी महाराज जी ने कहा कि पुष्प वाटिका में जब पूजा के लिए पुष्प चुनने के लिए श्री राम और लक्ष्मण जी पहुंचे, इसी समय जानकी जी गौरी पूजन के लिए वहां पहुंचीं। पुष्प वाटिका में ही सीता जी को राम जी का प्रथम दर्शन हुआ।
जानकी जी ने पूरी विनम्रता के साथ गौरी जी का पूजन कर अपने मन की बात उनसे कहीं, वाटिका से लौटकर राम और लक्ष्मण ने भी गुरु विश्वामित्र जी को वाटिका के घटनाक्रम की जानकारी दी।
कथा सुनाते हुए संत विजय कौशल जी महाराज ने कहा सद्गुणों की रक्षा जीवन में होनी चाहिए, उन्होंने भेष,भोजन और भाषा का ध्यान रखने की अपील की है। धनुष भंग की कथा सुनाते हुये पूज्य विजय कौशल जी ने कहा कि प्रभु राम ने गुरुदेव माता-पिता शंकर जी जनक व धनुष को प्रणाम किया व चाप चढ़ा दिया और उसके बाद धनुष भंग हो गया, धनुष भंग होने पर परशुराम जी प्रचंड क्रोध करते हैं यज्ञ मंडप में आ गये। प्रभु राम को पूर्ण अवतार होना जानकर परशुराम जी भगवान के समस्त नत मस्तक हो गये।
जनक जी राजा दशरथ को बारात लाने का आमंत्रण दिया। बारात के आमंत्रण पर राजा दशरथ भव्य बारात लेकर जनकपुर आये। भगवान राम जी उनके उनके तीनों भाइयों का भी विवाह हुआ। इसके साथ ही कथा का विश्राम हुआ। आज की कथा में
अतिथि के रूप में सतीश गौतम जी, सेवानिवृत्ति पुलिस अधिकारी, राजीव पांडे आयोजक डॉ उमेश पालीवाल, डॉ विवेक द्विवेदी, अजय पचौरी, उमेश निगम, डॉ सुनील सिंह, रविंद्र पालीवाल, आनंद निगम आदि भक्तगण उपस्थित रहे।

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