न्याय धारा/कानपुर नगर। शनिवार 28मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास शुक्ल पक्ष की दसमी, बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। श्री हनुमान कथा के सातवें दिन पर श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच कथा का आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। पूज्य विजय कौशल जी महाराज ने अपने ओजपूर्ण प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिकता, नैतिकता और जीवन मूल्यों का संदेश दिया।
आज के कथा प्रसंग में मुख्य यजमान महेंद्र अग्रवाल (KTL), रमेश सिंह यादव पूर्व ब्लॉक प्रमुख, दीपेश सिंह एवं विशिष्ट अतिथि ओमवीर सिंह, पनकी मंदिर महंत, शिवराम सिंह जिलाध्यक्ष भाजपा कानपुर दक्षिण, श्री राहुल दीक्षित आयकर अधिकारी ji की गरिमामयी उपस्थिति में महाराज जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान हनुमान जी केवल बल और पराक्रम के प्रतीक नहीं, बल्कि विनम्रता, सेवा, समर्पण और सच्ची भक्ति के आदर्श हैं। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, उस पर सदैव भगवान की कृपा बनी रहती है।
महाराज जी ने कहा कि मनुष्य को अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। सच्ची सफलता उसी को मिलती है जो अपने जीवन में अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक विचारों को अपनाता है। उन्होंने समाज की उन्नति के लिए सभी को मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।कथा के दौरान उन्होंने श्रीराम और श्री हनुमान जी के आदर्शों का वर्णन करते हुए बताया कि सच्चा धर्म मानव सेवा है और जीवन में सदा सत्य का पालन करना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास बनाए रखें तथा अपने जीवन में भजन, राम नाम और सत्संग को अपनाएं।
महाराज जी ने अपने प्रवचन में कहा कि जीवन में धैर्य, संयम और विनम्रता अत्यंत आवश्यक हैं। कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है। उन्होंने यह भी कहा कि मन को शांत रखते हुए अच्छे विचारों को अपनाना चाहिए और दूसरों के प्रति प्रेम एवं सम्मान का भाव रखना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि वे अपने जीवन में सादगी और उच्च विचारों को अपनाएं, बुराइयों से दूर रहें और अपने आचरण से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। सेवा भाव से किए गए कार्य ही वास्तविक धर्म हैं और यही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का रसपान करते रहे। आयोजन समिति द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।
अंत में कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ एस. के. पालीवाल, उपाध्यक्ष अनूप पचौरी, मंत्री उमेश निगम, संयोजक डॉ विवेक द्विवेदी, रवीन्द्र पालीवाल एवं अन्य सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं से कल कथा के अंतिम दिवस में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य कथा का लाभ लेने की अपील की।


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