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कविता के विविध रंगों से सराबोर रहा काव्याेत्सव

न्याय धारा/कानपुर नगर। रविवार 08मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की पंचमी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। मां सरस्वती देवी स्मृति साहित्यिक संस्थान कानपुर द्वारा आयोजित काव्याेत्सव में कवियों ने हास परिहास के साथ साथ कविता के विभिन्न रंग बिखेरे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि अशोक शास्त्री ने तथा संचालन कवि राजेश सिंह ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ कवि राजेन्द्र अवस्थी की वाणी वंदना से हुआ।

सुपरिचित कवयित्री अनीता ने अपनी रचना पर्वत की परिभाषा है अपनो से अति प्रेम करो अपनो का हाथ पकड़ करके मंजिल को प्रस्थान करो प्रस्तुत कर वाहवाही लूटी। कवि राजेन्द्र अवस्थी ने अपनी समाज से जुड़ी सम सामयिक रचना ये आग कैसी लगा के अपने हि घर को तुम क्यूं जला रहे हो.... ये बाग मिलकर लगाया सबने, तभी तो पूरे हुए है सपने, उजाड़ने को जो हैं संपर्पित। क्यूं साथ उनका निभा रहे हो*। प्रस्तुत कर तालिया बटोरीं। कवि अशोक शास्त्री ने मां को समर्पित अपनी रचना बूढ़ी मां को पूरे घर की चिंता रोज सताए अपने जर्जर दो कंधों पर सारा बोझ उठाए पढ़ कर वातावरण संवेदनशील बना दिया। कवि राजेश सिंह ने युद्ध की विभीषिका का चित्र खींचते हुए अपनी रचना वर्तमान युद्ध के सम्बन्ध में *ऐसी रचना रच न मानव जिसमे जल ही जल जाय सृजन पराजित विध्वंश अमर हो जाए* प्रस्तुत की।कवि शिवमूर्ति के मधुर मीत,दीप कुमार शुक्ल और राज कुमार सचान की हास्य व्यंग की रचनाएं बहुत सराही गईं।

आगंतुकों का स्वागत महेंद्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम का संयोजन श्रीमती नीलम सिंह ने किया।इस अवसर पर श्रीमती सीता सचान, सिवनी सिंह, शिखा सिंह, ब्रजेश पाल, अर्पिता सिंह, अविरल आरोही आदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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