न्याय धारा/कानपुर नगर। सोमवार 09मार्च 2026 (सूत्र/सूवि /पीआईबी) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की षष्ठी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन आईएमए के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। यह प्रेस वार्ता 12 मार्च को विश्व ग्लूकोमा दिवस (World Glaucoma Day 2026) तथा 10–16 मार्च तक मनाए जाने वाले वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के संबंध में आयोजित की गई।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन, सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव डॉ. शरद बाजपेयी, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं निदेशक कनिका हॉस्पिटल, कानपुर तथा डॉ. रुचिका अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने आए हुए पत्रकार बंधुओं का स्वागत करते हुए बताया कि विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के अवसर पर ग्लूकोमा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर के तत्वावधान में एक जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आंखों की गंभीर बीमारी काला मोतिया (Glaucoma) बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही है। आजकल यह बीमारी केवल वृद्धावस्था में ही नहीं, बल्कि कम उम्र के युवाओं में भी देखने को मिल रही है। इसके बावजूद लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता का अभाव है। ऐसे में लोगों के बीच जागरूकता लाने के लिए 8 से 14 मार्च तक वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक मनाया जा रहा है।
आईएमए कानपुर की सचिव प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि इस वर्ष का थीम “Uniting for a Glaucoma Free World” है। राष्ट्रीय ग्लूकोमा सोसाइटी एवं राष्ट्रीय आईएमए के द्वारा इस अभियान के माध्यम से पूरे देश में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंखों की नसों की जांच तथा आंखों के प्रेशर की जांच बहुत ही आसानी से किसी भी नेत्र विशेषज्ञ की क्लीनिक में कराई जा सकती है, जिससे ग्लूकोमा का समय रहते पता लगाया जा सकता है।
डॉ. शरद बाजपेयी, निदेशक कनिका हॉस्पिटल, कानपुर एवं वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को बीपी, शुगर या थायरॉइड जैसी बीमारियां हैं अथवा वह लंबे समय से स्टेरॉइड का सेवन कर रहा है, तो उसे ग्लूकोमा की जांच अवश्य करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि ग्लूकोमा कई बार परिवारों में भी पाया जाता है, इसलिए यदि परिवार में किसी को ग्लूकोमा की समस्या है तो अन्य सदस्यों को भी अपनी आंखों की जांच अवश्य करानी चाहिए, जिससे इस बीमारी का समय रहते पता लगाकर उपचार किया जा सके।
डॉ. रुचिका अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, रामा मेडिकल कॉलेज, कानपुर ने बताया कि इस वर्ष ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक इस अभियान का लाभ पहुंचाया जा सके। और परिवार में ग्लूकोमा होने पर ज्यादा सतर्क रहे।
आईएमए कानपुर के वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि ग्लूकोमा आज भी अंधता का एक प्रमुख कारण है, इसलिए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि नियमित नेत्र जांच कराकर इस बीमारी से बचाव के प्रति सजग रहें।

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