न्याय धारा/कानपुर नगर। शुक्रवार 13मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की दसमी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, कानपुर शाखा द्वारा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन आईएमए के कॉन्फ्रेंस हॉल में किया गया। यह प्रेस वार्ता "विश्व किडनी दिवस" (World Kidney Day 2026) के संबंध में आम जनता को किडनी के विषय में जागरूकता हेतु आयोजित की गई।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन, सचिव, डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, कानपुर तथा डॉ. देशराज गुर्जर वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, कानपुर एवम डॉ युवराज़ गुलाटी, गुर्दा रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज कानपुर, डॉ. विशाल सिंह, वित्त सचिव, डॉ. दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने आए हुए पत्रकार बंधुओं का स्वागत करते हुए बताया कि World Kidney Day के अवसर पर लोगों को किडनी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर किडनी रोगों की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। डॉ. मेहरोत्रा ने बताया विश्व किडनी दिवस हर वर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है और वर्ष 2026 में यह 12 मार्च को मनाया जा रहा है। यह एक वैश्विक जागरूकता अभियान है, जिसे International Society of Nephrology (ISN) तथा International Federation of Kidney Foundations (IFKF) द्वारा मनाया जाता है। इसका उद्देश्य गुर्दों के स्वास्थ्य के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक करना तथा क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के खतरों के प्रति सचेत करना है।
डॉ. दिलीप कुमार सिन्हा, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ, ने बताया कि प्रति वर्ष लगभग 20 लाख लोगों के गुर्दे फेल होने के मुख्य कारण निम्नलिखित है
- मधुमेह डाइबिटीज
- हाई ब्लड प्रेसर
- पथरी की बीमारी
- बार बार पेशाब का इन्फेक्शन यूरिक एसिड को बीमारी दर्द की दवाइया का लम्बे समय तक अनियंत्रित इस्तेमाल
बचाव के उपाय
- खाली पेट शुगर 120mg/dl से नीचे
- खाने के दो घंटे बाद शुगर 140mg/dl से नीचे
- ब्लड प्रेसर 130/80 से नीचे
- दर्द की दवा का लम्बे समय तक इस्तेमाल न करना
- प्रति वर्ष अपने पेशाब का ALBUMIN, CREATININE Ratio की जांच करना
डॉ. देशराज गुर्जर, वरिष्ठ गुर्दा रोग विशेषज्ञ ने बताया कि क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) को अक्सर एक "खामोश" (silent) बीमारी कहा जाता है क्योंकि इसके लक्षण तब तक दिखाई नहीं देते जब तक कि किडनी को काफी नुकसान न पहुँच गया हो। अपने स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जागरूकता और समय पर जांच ही सबसे प्रभावी तरीके हैं।
बचाव के मुख्य उपाय (Prevention Strategies)
रक्तचाप (Blood Pressure) को नियंत्रित रखेंः हाई ब्लड प्रेशर CKD का मुख्य रखने से किडनी की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं पर दबाव कम पड़ता है। कारण है। इसे कंट्रोल में
ब्लड शुगर पर नज़र रखें मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित लोगों के लिए शुगर लेवल को स्थिर रखना किडनी डैमेज (डायबिटिक नेफ्रोपैथी) को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है।
हाइड्रेटेड रहेः पर्याप्त पानी पीने से किडनी को शरीर से सोडियम और विषाक्त पदार्थों (toxins) को बाहर निकालने में मदद मिलती है।
नमक का सेवन कम करें। नमक कम करने से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है और शरीर में सूजन (fluid buildup) नहीं होती।
नियमित व्यायाम करें शारीरिक गतिविधि वजन को संतुलित रखती है और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करती है, जिसका सीधा संबंध किडनी के स्वास्थ्य से है।
बिना डॉक्टरी सलाह के दवाएं न लें दर्द निवारक दवाओं (जैसे इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन) का बार-बार सेवन समय के साथ किडनी को नुकसान पहुँचा सकता है।
इन लक्षणों पर ध्यान दें (Signs to Watch For)
शुरुआती दौर में CKD के लक्षण नहीं दिखते, फिर भी यदि आप नीचे दी गई समस्याओं का अनुभव करें तो
डॉक्टर से सलाह लें.
- लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना।
- पेशाब में बदलाव (रात में अधिक बार आना, या पेशाब में झाग/बुलबुले दिखना)।
- टखनों, पैरों या हाथों में सूजन (एडिमा)।
- आंखों के आसपास सूजन, खासकर सुबह के समय।
- त्वचा में लगातार खुजली होना।
- किडनी की जांच के लिए दो सरल टेस्ट
- किडनी कैसी कार्य कर रही है. यह जानने के लिए ये दो टेस्ट सबसे महत्वपूर्ण है।
ACR (पेशाब की जांच): यह पेशाब में एल्ब्यूमिन (प्रोटीन) की जांच करता है, जो डैमेज का शुरुआती संकेत है।
GFR (खून की जांच): यह मापता है कि आपकी किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रही है। > नोट: यदि आपके परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास रहा है, तो अपनी वार्षिक जांच के दौरान ये टेस्ट करवाना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
डॉ युवराज गुलाटी, गुर्दा रोग विभाग, मेडिकल कॉलेज कानपुर ने बताया कि किडनी की बीमारी अक्सर शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के धीरे-धीरे बढ़ती है। यही कारण है कि अधिकांश मरीजों में बीमारी का पता देर से चलता है, जब किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है। भारत में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) तेजी से बढ़ रही है और इसका प्रमुख कारण मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली है। किडनी रोग की प्रारंभिक पहचान के लिए साधारण रक्त जांच के साथ-साथ यूरिन एसीआर (Urine Albumin-Creatinine Ratio) टेस्ट अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह जांच मूत्र में बहुत कम मात्रा में एल्ब्यूमिन (प्रोटीन) की उपस्थिति को पहचान सकती है, जो किडनी खराब होने का सबसे शुरुआती संकेत हो सकता है। यदि समय पर यह जांच कर ली जाए तो किडनी की बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर उसका उपचार शुरू किया जा सकता है, जिससे किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। स्वस्थ किडनी के लिए संतुलित आहार, नमक का सीमित सेवन, पर्याप्त पानी पीना, धूम्रपान से दूरी, नियमित व्यायाम और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक हैं।
आईएमए कानपुर के वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष का थीम "Kidney Health for All Advancing Equitable Access to Care and Optimal Medication Practice" रखा गया है, जिसका उद्देश्य सभी लोगों तक बेहतर इलाज और उचित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। गुर्दे शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, रक्त को साफ करने तथा शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बनाए रखने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और पारिवारिक इतिहास वाले लोगों में किडनी रोग का खतरा अधिक होता है, इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच अत्यंत आवश्यक है।
आईएमए कानपुर के वित्त सचिव डॉ. विशाल सिंह, ने लोगों से अपील की कि वे किडनी को स्वस्थ
रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, संतुलित और पौष्टिक आहार लें, नमक का सेवन सीमित रखें, धूम्रपान और शराब से दूर रहें तथा समय-समय पर ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच अवश्य कराते रहें। इस अवसर पर आईएमए के कई वरिष्ठ चिकित्सक एवं सदस्य उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर किडनी रोगों की रोकथाम के लिए समाज में जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया।

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