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तुष्टीकरण में अब जातीय वर्गों का संतुष्टीकरण

न्याय धारा/कानपुर नगर। रविवार 08मार्च 2026 (सूत्र/लेख) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की पंचमी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। भारत की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां सवर्णों पिछड़ों एवं दलितों में वर्गसंहर्ष करवाना चाहती है ! ऐसी स्थितियों में सवर्ण वर्ग ही क्यों बलिवेदी पर चढ़ें ? बलिवेदी पर चढ़ना ही है तो क्यों न सम्पूर्ण हिन्दू समाज चढ़ें ? लेखक विद्यासागर त्रिपाठी मूसानगर कानपुर देहात

भारत की वर्तमान राजनीति सिर्फ सत्ता प्राप्त करने के लिए य सत्ता में बने रहने के लिए की जा रही है ! सत्ता प्राप्त करने य सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी निचले स्तर तक जा रहे हैं ! सत्ता के लिए ही जाति वर्गों में निरंतर बांटती जा रही ये राजनीतिक पार्टियां हिन्दू समाज को छिन्न भिन्न करके अपना स्वयं का हित साध रही हैं ! और उनके द्वारा बनाए जा रहे इस चक्रव्यूह में भारत का अधिसंख्य हिन्दू समाज फंसता भी जा रहा है ! एक विचारधारा से कहा जाता है कि "बटोगे तो कटोगे,, वहीं दूसरी विचारधारा तुरन्त पलटवार करती है कि "बटोगे तो कटोगे,, कहने वाले सांप्रदायिक हैं ! अर्थात हिन्दू वर्ग समाज को बटने से कोई नुकसान नहीं है अर्थात खूब बटो,खूब आपस में वर्ग संघर्ष करके वैमनस्यता बढ़ाओ ! 

हिन्दू समाज के बटने पर कोई काटेगा यह सिर्फ भ्रम फैलाया जा रहा है ऐसा कह कर वह विचारधारा अपना हित साधना चाहती है ! क्योंकि उनकी यह बात विगत के इतिहास को देखते हुए स्पष्ट रूप से गलत दिशा की ओर ले जाने का कुत्सित प्रयास दिखाई देता है,भारत का विगत इतिहास बताता है कि हिन्दू समाज एक बार नहीं बल्कि कई बार काटा गया है,तब काटने वालों ने सवर्ण पिछड़ा दलित को वर्गों में वर्गीकृत करके नहीं काटा बल्कि सामूहिक दृष्टि रखकर नर संहार किए हैं ! भविष्य के भारत में भी यदि ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं,तब उस समय भी सवर्ण पिछड़ा दलित वर्ग अलग अलग वर्गीकृत नहीं किया जायेगा ! बल्कि सामूहिक रूप से हिन्दूओं को निशाने पर लिया जायेगा ! जैसा विगत इतिहास में बार बार देखा गया है ! क्योंकि वह विचारधारा समस्त हिन्दू समाज को काफिर मानती है,किसी ब्राम्हण ठाकुर वैश्य व अगड़े पिछड़े व दलित में विभक्त नहीं करती है !

ऐसी स्थितियों से बचने का एक मात्र उपाय है, हिन्दू समाज की एकजुटता एवं सामूहिकता में एकजुट सर्व समाज ! लेकिन भारत के हिन्दू वर्ग समाज को आपस में बाटने का यह कुचक्र विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता बखूबी कर रहे हैं,भारत में एक दल दूसरे अन्य दलों पर मुस्लिम तुष्टीकरण करने का आरोप लगाते रहे हैं लेकिन वही दल अब भारत में जाति वर्ग में ही विभाजन करके किसी जाति वर्ग का संतुष्टीकरण करके व दूसरे जाति वर्ग को शोषण करता सिद्ध करने की आश्चर्यजनक विचारधारा लेकर चल पड़ा है, "एक बनों नेक बनों,की वह राष्ट्रवादी विचारधारा एकाएक भरभरा कर गिर गई है ! भारत का हर नागरिक यह भी बखूबी जानता है कि भारत के अधिकांश राजनीतिज्ञों ने अपने बच्चों के रहने खाने की सारी व्यवस्थाएं विदेशों में सुरक्षित कर रखी हैं ! अधिकांश नेता अपने बच्चों के भविष्य को देखते हुए ही उनके पठन पाठन रहने खाने की सारी व्यवस्थाएं भी विदेशों में बनाकर रखी हुई हैं !

यदि देश में आगे कभी भी कोई संकट आया (जैसा आगे दिखाई दे रहा है) तो भुगतेगा कौन ? भुगतेगा सिर्फ भारत का वो जातियों एवं वर्गों में बटा हिन्दू समाज,उपरोक्त बात को अभी हिन्दू वर्ग समाज समझने के लिए तैयार नहीं है, लेकिन जिस दिन उपरोक्त बात जाति वर्ग में बटे लोगों को समझ में आयेगी,तब तक बहुत देर हो चुकी होगी ! बड़े बड़े दलों के नेता गण अपने परिवारों के साथ विदेशों में सरण ले चुके होंगे ! कुछ अपना धर्मांतरण कर चुके होंगे कुछ योगेंद्र मंडल जी की तरह किसी और धर्म की छाया में शान्ति महसूस कर रहे होंगे ! और तब सामान्य हिन्दू के पास पछतानें के अलावा और कुछ शेष नहीं बचा होगा ! यदि समय रहते जाग सको तो जागो,और यदि नहीं जाग सकते हैं तो विपरीत परिस्थितियों को लाने के लिए हम आप सब लोग ही स्वयं ही जिम्मेदार होंगे,और  हमारी आगे आने वाली अगली पीढ़ी हमें क्या कह कर सम्बोधित करेगी विचार कर सकते हैं,वह आगे आने वाली घोर संकटों से घिरी हुई अगली पीढ़ी कभी हमें माफ कर सकेगी य नहीं यह भी एक अत्यन्त गंभीर विचारणीय बिन्दु है ।

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