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सीएसजेएमयू के पत्रकारिता विभाग में 'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर कार्यशाला

न्याय धारा/कानपुर नगर। शुक्रवार 06मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की तृतीया, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक की प्रेरणा और मार्गदर्शन में पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में शुक्रवार को दो दिवसीय 'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया कार्यशाला' शुरु हुई। इसमें इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की वरिष्ठ पत्रकार श्वेता अरोड़ा ने छात्र छात्राओं को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बारीकियां बताई। 

इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बारीकियां और कार्यविधि समझाना था। पहले दिन दो सत्रों में टीवी मीडिया राइटिंग के तकनीकी पक्ष के बारे में जानकारी दी गई। 

जिसमें मुख्य वक्ता ने बताया कि टीवी की स्क्रिप्ट प्रिंट मीडिया की लेखनी से बिल्कुल अलग होती है। टीवी में "लिखा वही जाता है जो पर्दे पर दिखता है।" उन्होंने यह भी कहा कि अच्छा लेखक वही बन सकता है जिसको अच्छा लिखना आता हो। साथ ही उसको पढ़ने की आदत हो वही अच्छा लिख सकता है। उन्होंने न्यूज़ पैकेज की संरचना को विस्तार से समझाया। एक आदर्श पैकेज में एंकर लिंक, वॉइस ओवर (VO), बाइट्स (Bytes), पीटीसी (PTC - Piece to Camera) और विजुअल्स का सही संतुलन कैसे बनाया जाता है। उन्होने व्यावहारिक सुझाव भी दिए। एवी (AV - Audio Visual) और एवीबी (AVB - Audio Visual Bite) समाचार बुलेटिन में समय की कमी होने पर छोटी और प्रभावपूर्ण खबरें कैसे लिखी जाएं, इसके लिए एवी और एवीबी फॉर्मेट की बारीकियां सिखाई गईं। छात्रों को बताया गया कि कैसे कम शब्दों में पूरी खबर का सार दर्शकों तक पहुँचाया जा सकता है।

दूसरे सत्र में उन्होंने समाचार एजेंसियों जैसे एएनआई (ANI) और पीटीआई (PTI) से आने वाली अंग्रेजी या अन्य भाषाओं की फीड (Feed) के सटीक हिंदी अनुवाद पर ज़ोर दिया। वरिष्ठ पत्रकार ने स्पष्ट किया कि अनुवाद केवल शब्दों का नहीं, बल्कि भावों और तथ्यों का होना चाहिए। अक्सर न्यूज़ रूम में डेस्क पर काम करने वाले पत्रकारों को जल्दबाज़ी में एजेंसियों की कॉपी का अनुवाद करना होता है। इस प्रक्रिया में खबर का मूल अर्थ न बदले और भाषा दर्शकों के अनुकूल हो, इसके लिए लाइव उदाहरणों के साथ छात्रों से अभ्यास भी कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी टीवी कार्यक्रम या न्यूज़ बुलेटिन के पीछे एक लंबी तकनीकी प्रक्रिया होती है। उन्होने प्री-प्रोडक्शन (Pre-Production),प्रोडक्शन(Production)पोस्ट-प्रोडक्शन (Post-Production) के बारे में जानकारी दी। 

इसके साथ उन्होंने ग्राफिक्स ,विजुअल्स, स्लग, टिकर के बारे में भी बताया। इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर अवस्थी ने कहा कि आज के डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक युग में एक पत्रकार का बहुआयामी (Multitasking) होना आवश्यक है। कार्यशला के सम्वयक डॉ. ओम शंकर गुप्ता ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्रों को क्लासरूम की थ्योरी से निकालकर न्यूज़रूम की वास्तविक कार्यप्रणाली से जोड़ना है। इस कार्यशाला में डॉ. रश्मि गौतम, डॉ. हरिओम कुमार भी मौजूद रहे।

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