Customised Ads
पूज्य महाराज विजय कौशल जी ने सुनाई लक्ष्मण मूर्छा की कथा

न्याय धारा/कानपुर नगर। गुरुवार 26मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी (चैत्र नवरात्रि उत्सव), बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर।  छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित हो रही श्री हनुमान कथा के पांचवें दिन पूज्य संत विजय कौशल जी महाराज ने रामायण में लक्ष्मण मूर्छा के प्रसंग को अत्यंत मार्मिक ढंग से सुनाते हैं, जिसमें वे प्रभु राम की मानवीय लीला और भ्रातृ प्रेम को रेखांकित करते हैं।

वे बताते हैं कि मेघनाद के शक्ति बाण से लक्ष्मण के मूर्छित होने पर राम ने एक साधारण मनुष्य की तरह प्रलाप किया और कहा कि वे लक्ष्मण के बिना असहाय हैं, जैसे पंख बिना पक्षी। भगवान राम ने इस समय लक्ष्मण जी को सहोदर ( एक उदर-गर्भ से पैदा) कह कर संबोधित किया।

प्रभु श्रीराम के प्रति हनुमान जी की भक्ति के विषय में बताते हुये पूज्य महराज जी ने कहा कि लक्ष्मण जी की मूर्छा दूर करने को रात्रि में लंका के अंदर से राज वैध सुसैन को लाने को हनुमान जी ने कहा की मैं हूँ ना। हनुमान जी राज वैध को लाते है और उनके कहने पर संजीवनी बूटी लाने को पूरा रत्नागिरी पर्वत उठा कर वायु मार्ग से अयोध्या के ऊपर से गुजरते है और भरत जी से मिलते है। भरत जी ने हनुमान जी को वाण पर बैठा कर उन्हें राम जी के पास भेजा।

उन्होंने कहा कि रावण के पास ६००० सैनिकों की अमर सेना थी जिसको मारा नहीं जा सकता था। उस सेना को रावण द्वारा युद्ध में उतारने पर हनुमान जी ने कहा कि मुझे माँ सीता जी ने अजर और अमर होने का वरदान दिया है मैं उससे अकेले ही उनसे सामना करूँगा इसके बाद हनुमान जी ने बारी-बारी से सभी को पूंछ में लपेटकर अंतरिक्ष में भेज दिया जिससे वे वहीं उपग्रह की तरह चक्कर लगाते रहे और वापस ना आ सके।

उन्होंने कहा कि भगवान का कोई रूप और नाम नहीं होता यह उन्हें भक्त देता है। भगवान खोजे नहीं पुकारे जाते है इसे समझने के लिए महाराज जी ने नरसी भक्त की पूरी कथा सुनायी।

कथा के पांचवे दिन उप्र विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना जी, कानपुर-अकबरपुर लोकसभा से सांसद देवेंद्र सिंह भोले, विधायक महेश त्रिवेदी, विधायक अमिताभ बाजपेयी, महापौर श्रीमती प्रमिला पांडेय, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कोरी महिला आयोग की सदस्य श्रीमती अनीता गुप्ता जी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय पाठक, कुलप्रतिष्ठा वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ वंदना पाठक, वित्त नियंत्रक अशोक त्रिपाठी, डॉ उमेश पालीवाल डॉ विवेक द्विवेदी उमेश निगम अनूप पचौरी एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

टिप्पणियाँ