न्याय धारा/कानपुर नगर। शुक्रवार 27मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास शुक्ल पक्ष की नवमी (रामनवमी उत्सव), बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। श्री हनुमान कथा के छठवें दिन* पर श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बीच कथा का आयोजन अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। पूज्य विजय कौशल जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं ज्ञानवर्धक प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत कर दिया।
कथा के छठवें दिन मुख्य यजमान चरनजीत मेहरा जी एवं कुंज बिहारी लाल निगम जी तथा अतिथि जुगल किशोर जी (सेवानिवृत्त आई.पी.सी.), डॉ. सक्षम पाण्डेय, आर.आर. सोनी उपायुक्त परिवहन की गरिमाामयी उपस्थिति पर महाराज जी ने नारद जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए समझाया कि अहंकार मनुष्य के विवेक को नष्ट कर देता है। भगवान स्वयं अपने भक्तों के अहंकार को दूर कर उन्हें सही मार्ग पर लाते हैं। उन्होंने बताया कि सच्चा भक्त वही है जो हर परिस्थिति में भगवान पर विश्वास बनाए रखता है।
महाराज जी ने कहा कि भगवान किसी के बाहरी रूप, धन या पद को नहीं देखते, बल्कि वे केवल प्रेम, भक्ति और समर्पण को स्वीकार करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जीवन में धैर्य, संयम और विनम्रता का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि वे अपने जीवन में अच्छे संस्कार अपनाएं, परिवार और समाज में प्रेम एवं सद्भाव बनाए रखें तथा अपने आचरण से दूसरों के लिए प्रेरणा बनें। इस काल खंड में पूज्य महाराज जी के द्वारा राम जन्मोत्सव की भी कथा सुनाई गई। कथा के दौरान भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर कथा का आनंद लेते रहे। आयोजन समिति द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।अंत में कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ एस. के. पालीवाल, विवि के कुलपति प्रो.विनय कजमार पाठक, कुलप्रतिष्ठा वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्या डॉ वंदना पाठक, उपाध्यक्ष अनूप पचौरी मंत्री उमेश निगम, संयोजक डॉ विवेक द्विवेदी ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस दिव्य कथा का लाभ लेने की अपील की।


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