न्याय धारा/कानपुर नगर। सोमवार 16मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की द्वादशी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। कुलपति, प्रो. विनय कुमार पाठक के दूरदर्शी संरक्षण और निदेशक प्रो. आर.के. द्विवेदी एवं उप-निदेशक डॉ. अंजू दीक्षित के गरिमामय मार्गदर्शन में, "मन प्रबंधन का विज्ञान" (Science Behind Mind Management) पर एक गहन व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। यह ज्ञानवर्धक कार्यक्रम 'श्रीमद्भगवद्गीता एवं वैदिक वांग्मय शोध पीठ' तथा 'स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज' की एक संयुक्त पहल थी।
सत्र का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जो अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा का प्रतीक है। हमें मुख्य अतिथि के रूप में पूजनीया स्वामिनी विमलानंद जी (आचार्या, चिन्मय मिशन, कोयंबटूर) की मेजबानी करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। स्वामी राघवानंद जी और राज कुमार लोहिया जी की उपस्थिति ने इस अवसर की शोभा और बढ़ा दी।
डॉ. अंजू दीक्षित ने स्वामिनी जी को औपचारिक शॉल भेंट कर सम्मानित किया। श्रीमती गीता गुप्ता ने पुष्पगुच्छ से उनका स्वागत किया। प्रो. आर.के. द्विवेदी ने पवित्र 'तुलसी पदक' भेंट किया। प्रो. आर.के. द्विवेदी ने दोपहर के सत्र की भूमिका बांधते हुए आधुनिक जीवन की जटिलताओं, विशेष रूप से युवाओं के लिए आध्यात्म और ज्ञान की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने विचार साझा किए। तत्पश्चात, डॉ. अनिल गुप्ता द्वारा दर्शकों को 'गीता शोध पीठ' के कार्यों से परिचित कराया गया और श्री सदानंद जी द्वारा स्वामिनी जी का आत्मीय परिचय दिया गया।
स्वामिनी जी के व्याख्यान के मुख्य अंश:एक घंटे के मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रवचन में, स्वामिनी जी ने मानव मन की कार्यप्रणाली की गहराई से व्याख्या की।
चुनाव की शक्ति: स्वयं का एक बेहतर संस्करण बनाने के लिए 'विवेक' और 'चयन शक्ति' का उपयोग करना।_
उद्देश्यपूर्ण जीवन: साधन और साध्य (लक्ष्य) के बीच के संबंध को समझना।
M.C.E. नियम: उन्होंने सभी को प्रतिदिन 10 मिनट के 'न्यूनतम, अनिवार्य और विशिष्ट' (Minimum, Compulsory, and Exclusive) ध्यान (ध्यान) के अभ्यास को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
चरित्र निर्माण: एक बिखरे हुए व्यक्तित्व से एकीकृत व्यक्तित्व की ओर बढ़ने के लिए अच्छी संगति और अपने अंतःकरण की आवाज सुनने का महत्व।
डॉ. दुर्गेश सिंह द्वारा कुशलतापूर्वक संचालित इस कार्यक्रम में डॉ. नमिता तिवारी (डीन आरएंडडी) और स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज व गीता शोध पीठ के समस्त संकाय सदस्यों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। पूरा हॉल मंत्रमुग्ध रहा और सभी प्रतिभागी मानसिक कल्याण के प्रति एक नई प्रेरणा और स्पष्ट मार्ग लेकर विदा हुए।


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