न्याय धारा/लखनऊ। गुरुवार 12मार्च 2026 (सूत्र/सूवि /पीआईबी) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास कृष्ण पक्ष की नवमी, बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में आज प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता और ब्रह्माकुमारीज़ की प्रेरक मार्गदर्शक बीके शिवानी दीदी का विशेष प्रेरणादायी सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अतिथियों और आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में सकारात्मक सोच, नैतिक मूल्यों और संतुलित व्यक्तित्व के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स द्वारा इस प्रकार के प्रेरणादायी आयोजन की सराहना की।
अपने संबोधन में बीके शिवानी दीदी ने कहा कि “सही विचार ही सही जीवन का निर्माण करते हैं।” उन्होंने बताया कि यदि व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक और संतुलित बनाए रखे तो जीवन में शांति, संतुलन और सफलता स्वतः प्राप्त होती है। उन्होंने आत्मचिंतन, भावनात्मक संतुलन तथा करुणा, धैर्य और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया।
उन्होंने वर्तमान समय में बढ़ते मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के अत्यधिक उपयोग पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के बच्चों का बचपन स्क्रीन के साथ बीत रहा है, जिससे वे लिखने की अपेक्षा टाइपिंग में अधिक सहज हो रहे हैं। डिजिटल माध्यमों पर अत्यधिक समय बिताने से बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और कई बार इसके कारण अवसाद जैसी स्थितियां भी सामने आती हैं। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से बच्चों को संतुलित जीवनशैली, सकारात्मक विचारों और आध्यात्मिक मूल्यों की ओर प्रेरित करने का आह्वान किया।कार्यक्रम में लखनऊ के अनेक गणमान्य नागरिकों की भी उपस्थिति रही। टेक्नो ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन्स की अध्यक्ष श्रीमती विधि अग्रवाल ने चेयरमैन आर.के. अग्रवाल तथा प्रबंध निदेशक डॉ. ऋषि अग्रवाल के साथ मिलकर बीके शिवानी दीदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शिवानी दीदी के प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित सभी लोगों को सकारात्मकता और आध्यात्मिक जागरूकता के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। यह सत्र सभी उपस्थित लोगों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी और समृद्ध अनुभव सिद्ध हुआ।


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