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कानपुर कमिश्नरेट के 5 साल पूर्ण होने पर समाज के विभिन्न वर्गों ने की कमिश्नरेट प्रणाली की समीक्षा

न्याय धारा/कानपुर नगर। गुरुवार 26मार्च 2026 (सूत्र/संवाददाता) सूर्य उत्तरायण, चैत्र मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी (चैत्र नवरात्रि उत्सव), बसंत ऋतु २०८३ रौद्र नाम संवत्सर। आज कानपुर नगर में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने के 5 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल की अध्यक्षता में पुलिस कार्यालय सभागार में "मंथन" नामक एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 

मंथन- "कमिश्नरेट प्रणाली- चुनौतियां एवं भविष्य की राह" इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कमिश्नरेट प्रणाली के पिछले अनुभवों की समीक्षा करना, सामने आई चुनौतियों पर चर्चा करना तथा भविष्य की दिशा तय करना रहा। अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय/अपराध संकल्प शर्मा, पुलिस उपायुक्त यातायात, रवीन्द्र कुमार, प्रभारी पुलिस उपायुक्त लाइन्स श्रीमती शिवा सिंह, स्टाफ ऑफिसर अमरनाथ सिंह, एसीपी चकेरी अभिषेक पाण्डेय सहित अन्य पुलिस अधिकारी / कर्मचारी मौजूद रहे।कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े सम्मानित व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया, जिनमें अधिवक्ता, मीडिया प्रतिनिधि, चिकित्सक, महिला आयोग के सदस्य, समाजसेवी, व्यापार मंडल के प्रतिनिधि एवं पुलिस विभाग के अधिकारी/ कर्मचारीगण शामिल रहे। सभी प्रतिभागियों ने अपने-अपने अनुभव साझा करते हुए कमिश्नरेट प्रणाली के प्रभाव, उपयोगिता एवं सुधार के बिंदुओं पर खुलकर विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में अनुराग मेहरोत्रा (आईएमए अध्यक्ष), अधिवक्ता विनय मिश्रा (महामंत्री, बार एसोसिएशन), अधिवक्ता राजीव यादव (महामंत्री, लॉयर्स एसोसिएशन), डॉ. शुभाशिनी खन्ना (लघु उद्योग भारती सचिव एवं NGO निदेशक), गौरव दीक्षित (ब्यूरो चीफ, दैनिक जागरण), सुधीर मिश्रा (दैनिक जागरण/आइ-नेक्स्ट), अमित गंजू (न्यूज 18 यूपी), सिमर चावला (आज तक), उमंग अग्रवाल (व्यापार मंडल), धनीराम पैंथर (समाज सेवी), बलराम नरूला एवं हरजिंदर सिंह लॉर्ड आदि शामिल रहे और सभी ने एक-एक करके अपने-अपने विचार व्यक्त किये। पुलिस विभाग की ओर से पुलिस उपायुक्त यातायात रवीन्द्र कुमार, एसीपी चकेरीक अभिषेक पाण्डेय, निरीक्षक अशोक दुबे एवं उपनिरीक्षक प्रीतांजलि यादव ने पुरानी पुलिस प्रणाली और कमिश्नरेट प्रणाली के अन्तर एवं फायदे बताये।चर्चा के दौरान प्रतिभागियों ने कमिश्नरेट प्रणाली से हुए सकारात्मक बदलावों पर प्रकाश डाला। विशेष रूप से कानून-व्यवस्था में सुधार, त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया, बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट और जनता के साथ पुलिस की बढ़ती सहभागिता को सराहा गया। साथ ही, कुछ प्रतिभागियों ने व्यावहारिक समस्याएं एवं चुनौतियां भी सामने रखीं, जैसे कि संसाधनों की आवश्यकता, समन्वय को और बेहतर बनाने की जरूरत तथा जनसुनवाई व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के सुझाव दिए।

कार्यक्रम के अंत में पुलिस आयुक्त महोदय द्वारा सभी प्रतिभागियों के सुझावों एवं समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके समाधान हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं जनोन्मुखी बनाने के लिए इस प्रकार के संवाद अत्यंत आवश्यक हैं।

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