न्याय धारा/कानपुर नगर। बुधवार 25फरवरी 2026 (सूत्र/सूवि /पीआईबी) सूर्य उत्तरायण, फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष की नवमी (होलाष्टमी प्रारम्भ), बसंत ऋतु २०८२ कालयुक्त नाम संवत्सर। अपर निदेशक/संयोजक, पेंशन अदालत, कोषागार एवं पेंशन, कानपुर मण्डल, पवन कुमार ने अवगत कराया कि उत्तर प्रदेश सरकार के सेवानिवृत्त एवं मृत राजकीय सेवकों के सेवानिवृत्तिक लाभों से संबंधित समस्याओं के निस्तारण हेतु मण्डलायुक्त की अध्यक्षता में वित्तीय वर्ष 2025-26 की कानपुर मण्डल की तृतीय (93वीं) पेंशन अदालत का आयोजन माह मार्च 2026 के चतुर्थ सप्ताह में प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि कानपुर मण्डल के अंतर्गत आने वाले जनपदों के ऐसे सेवानिवृत्त राजकीय सेवक अथवा मृतक सेवकों के आश्रित, जिनकी पेंशन अथवा सेवानिवृत्तिक लाभों से संबंधित समस्याएं लंबित हैं, वे निर्धारित प्रारूप में अपना वाद पत्र तीन प्रतियों में पंजीकृत डाक के माध्यम से अपर निदेशक, कोषागार एवं पेंशन, कलेक्ट्रेट कम्पाउंड, कानपुर मण्डल, कानपुर के पते पर इस प्रकार प्रेषित करें कि वह दिनांक 12 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से प्राप्त हो जाए। निर्धारित तिथि के पश्चात प्राप्त वाद पत्रों पर पेंशन अदालत में विचार नहीं किया जाएगा।
यह भी अपेक्षित है कि आवेदक अपने वाद पत्र की एक प्रति अपने संबंधित कार्यालयाध्यक्ष या विभागाध्यक्ष, जहां वह अंतिम तैनाती के समय कार्यरत थे, को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराएं। पेंशन अदालत में ऐसे प्रकरणों पर विचार नहीं किया जाएगा, जो किसी न्यायालय अथवा शासन स्तर पर पहले से निर्णीत हो चुके हों, विचाराधीन हों अथवा नीतिगत प्रकृति के हों। केवल राजकीय कार्मिकों से संबंधित प्रकरण ही स्वीकार किए जाएंगे।
आवेदन पत्र में आवेदक का नाम व पदनाम, पिता या पति का नाम, सेवानिवृत्ति से संबंधित कार्यालय का विवरण, विभागाध्यक्ष का नाम, जन्म तिथि, सेवा में प्रवेश की तिथि, सेवानिवृत्ति या मृत्यु की तिथि, कार्यालयाध्यक्ष को पेंशन स्वीकृति या पुनरीक्षण हेतु प्रार्थना पत्र दिए जाने की तिथि (साक्ष्य सहित), कार्यालयाध्यक्ष द्वारा प्रकरण अग्रेषित किए जाने की तिथि, पेंशन स्वीकर्ता अधिकारी द्वारा उठाई गई आपत्तियों का विवरण, उनके प्रत्युत्तर का विवरण, अपेक्षित राहत का स्पष्ट उल्लेख, पत्र व्यवहार का पूर्ण पता (पिन कोड सहित) तथा संबंधित कोषागार का नाम अंकित करना अनिवार्य होगा।
साथ ही आवेदक को यह घोषणा भी करनी होगी कि उसका प्रकरण नीतिगत नहीं है तथा किसी न्यायालय में विचाराधीन नहीं है। यदि कोई मामला न्यायालय में लंबित है, तो शपथ पत्र के साथ यह उल्लेख करना होगा कि वह न्यायालय के बाहर समझौता करने एवं अपना वाद वापस लेने के लिए सहमत है। आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर एवं दिनांक अंकित करना अनिवार्य होगा।

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